पान मसाले पर नया ‘उपकर’: स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संसाधनों का एक नया द्वार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि पान मसाला के उत्पादन पर एक नया उपकर लगाया जाएगा। इस उपकर का दोहरा उद्देश्य है: पहला, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधनों को जुटाना और दूसरा, सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान करना। यह राशि राज्यों के साथ भी साझा की जाएगी, ताकि वे स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को मजबूत कर सकें।
जीएसटी व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं
यह स्पष्ट किया गया है कि इस नए उपकर का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की मौजूदा व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पान मसाले के उपभोग पर पहले से लागू 40% का जीएसटी दर जस की तस बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह उपकर हानिकारक वस्तुओं पर ही लगाया जाएगा, न कि आवश्यक वस्तुओं पर। उनका मानना है कि उपकर लगने से पान मसाले की कीमतों में वृद्धि होगी, जिससे इसके सेवन में कमी आएगी।
“स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025” का महत्व
यह विधेयक, जिसका पूरा नाम ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ है, पान मसाला पर लगाए जाने वाले क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा। इसका मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े व्यय के लिए धन जुटाना है। उपकर उन मशीनों या प्रक्रियाओं पर लगाया जाएगा जो इन उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होती हैं।
क्षतिपूर्ति उपकर की पृष्ठभूमि
मालूम हो कि जुलाई 2017 में जीएसटी की शुरुआत के समय, राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए 30 जून 2022 तक पांच साल के लिए क्षतिपूर्ति उपकर लागू किया गया था। इस व्यवस्था को बाद में 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था। इस उपकर से एकत्रित धन का उपयोग केंद्र द्वारा राज्यों को कोविड महामारी के दौरान जीएसटी राजस्व हानि की भरपाई के लिए दिए गए ऋणों को चुकाने में किया जा रहा है।
यह नया उपकर न केवल राजस्व जुटाने का एक साधन होगा, बल्कि यह देश की सुरक्षा और नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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