बड़ी खुशखबरी! लोन हुआ सस्ता, RBI ने रेपो रेट में की कटौती
अगर आप नया घर, गाड़ी खरीदने का सपना देख रहे हैं या EMI के बोझ से परेशान हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख नीतिगत दर, यानि रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती कर दी है। अब यह दर 5.25% पर आ गई है। यह निर्णय देश के मजबूत आर्थिक विकास और नियंत्रण में आती महंगाई के मद्देनजर लिया गया है। इस कटौती से बैंकों द्वारा होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और छोटे बिजनेस लोन पर ब्याज दरें कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, जमा दरों में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।
आर्थिक विकास को बूस्ट, महंगाई पर लगाम
RBI की मौद्रिक नीति समिति, देश के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन से उत्साहित होकर, वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि अनुमान को 50 आधार अंकों से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया गया है। यह उल्लेखनीय है कि रुपये में कुछ गिरावट के बावजूद, छह-सदस्यीय एमपीसी ने विकास और महंगाई दोनों के संकेतकों का बारीकी से आकलन करने के बाद रेपो दर घटाने का फैसला किया।
खुदरा महंगाई ऐतिहासिक निचले स्तर पर
जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही में जीडीपी में 8.2% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 5.6% से काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त, खुदरा महंगाई में भी जबरदस्त गिरावट आई है। अक्टूबर 2025 में सीपीआई महंगाई मात्र 0.25% रही, जबकि सितंबर में यह 1.4% थी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि इस साल भारत ने “तेजी से डिसइन्फ्लेशन” (महंगाई में कमी) का अनुभव किया है। उन्होंने बताया कि आयकर और जीएसटी के सरलीकरण, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, सरकारी पूंजीगत व्यय में अग्रिम बढ़ोतरी और अनुकूल धन-परिस्थितियों ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। ग्रामीण मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि शहरी मांग में लगातार सुधार हो रहा है। निजी निवेश भी अब गति पकड़ रहा है।
संतुलित और दूरदर्शी कदम
RBI ने अनुकूल व्यापक आर्थिक स्थिति को देखते हुए विकास अनुमान को बढ़ाया है और महंगाई अनुमान को घटाया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, खाद्य आपूर्ति की स्थिति बेहतर हुई है। उच्च खरीफ उत्पादन, रबी की अच्छी बुआई, जलाशयों में पर्याप्त पानी और अनुकूल नमी ने कीमतों पर दबाव कम किया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी स्थिर हैं और वैश्विक कीमतों में नरमी बनी हुई है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि RBI ने अपना ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखा है, जिसका अर्थ है कि भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ऊपर या नीचे हो सकता है।
संक्षेप में, RBI की यह दर कटौती ऐसे समय में आई है जब भारत तेज आर्थिक विकास और ऐतिहासिक रूप से कम महंगाई के एक दुर्लभ संयोजन का अनुभव कर रहा है। यह कदम संतुलित, सतर्क और भविष्योन्मुखी है। यह स्पष्ट संकेत देता है कि RBI विकास को बढ़ावा देना चाहता है, लेकिन बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर भी पैनी नजर रखे हुए है।
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