2025 बिहार चुनाव: हार के बाद राजद का अटूट संकल्प – “गरीबों की पार्टी, आवाज़ बुलंद करते रहेंगे!”
2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने दृढ़ता से कहा है कि उतार-चढ़ाव जीवन का हिस्सा हैं, और पार्टी गरीबों के लिए हमेशा खड़ी रहेगी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर हिंदी में जारी एक पोस्ट में, राजद ने कहा, “जनसेवा एक अनवरत प्रक्रिया है, एक अंतहीन यात्रा है! इसमें उतार चढ़ाव आना तय है। हार में विषाद नहीं, जीत में अहंकार नहीं! राष्ट्रीय जनता दल गरीबों की पार्टी है, गरीबों के बीच उनकी आवाज़ बुलंद करते रहेगी!”
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद की अप्रत्याशित हार: 25 सीटों पर सिमटा दल
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान, कुछ ही लोगों ने कल्पना की होगी कि शानदार शुरुआत करने वाले तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। 25 साल की उम्र में उपमुख्यमंत्री बनने के 10 साल बाद, लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी तेजस्वी ने राघोपुर सीट से जीत हासिल की, लेकिन उनके नेतृत्व में राजद इस चुनाव में केवल 25 सीटों पर सिमट गया।
क्रिकेट से राजनीति तक: तेजस्वी की यात्रा में एक नया मोड़
क्रिकेटर के रूप में अपने करियर में उड़ान भरने में असफल रहे तेजस्वी यादव ने राजनीति में एक नई शुरुआत की और सफलता भी हासिल की। हालांकि, बिहार के सबसे शक्तिशाली परिवार के इस वंशज ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके नेतृत्व में पार्टी को विपक्षी दल का दर्जा पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा। 2015 में राजनीति में प्रवेश करने से कुछ साल पहले क्रिकेट को अलविदा कहने वाले तेजस्वी को लालू प्रसाद ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। पिछले विधानसभा चुनाव में जीत के बाद वे नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री बने।
धनशोधन मामले का साया और ‘जंगलराज’ का डर
तेजस्वी की किस्मत में एक नया मोड़ तब आया जब उनके पिता, लालू प्रसाद, रेल मंत्री थे, तब कथित अवैध भूमि लेनदेन से जुड़े धनशोधन मामले में उनका नाम सामने आया। इस घोटाले के समय तेजस्वी किशोरावस्था में थे। इस मुद्दे ने भारी विरोध को जन्म दिया और नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़ लिया। 2020 के बिहार चुनाव में 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे राजद की संख्या इस बार घटकर आधी से भी कम रह गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि तेजस्वी, सत्तारूढ़ गठबंधन के ‘जंगलराज’ की वापसी के दावे का मुकाबला करने में पूरी तरह विफल रहे।
‘रंगदार’ और ‘कट्टा’ का बयान: ‘जंगलराज’ की कहानी को बल
मंच पर राजद उम्मीदवारों द्वारा कथित अनुचित बातों, नाबालिगों द्वारा ‘रंगदार’ बनने और ‘कट्टा’ (देश में बनी बिना लाइसेंस वाली पिस्तौल) लहराने की महत्वाकांक्षा जताए जाने पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी ने ‘जंगलराज’ की कहानी को और बल दिया। ऐसा लगता है कि तेजस्वी ने 20 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद अपने पूर्व बॉस और पिता के धुर विरोधी नीतीश कुमार का आकलन करने में भी गलती की।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


