ए.आर. रहमान: बॉलीवुड की गंदी राजनीति का शिकार या अपने ही फीके पड़ते संगीत का अंजाम?

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
6 Min Read
ए.आर. रहमान: बॉलीवुड की गंदी राजनीति का शिकार या अपने ही फीके पड़ते संगीत का अंजाम?
ar rahman a victim of bollywood dirty politics or his own musical decline

ए.आर. रहमान हिंदी सिनेमा के कैनवास पर उभरी वह जादुई लहर हैं, जिनकी तुलना केवल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से की जा सकती है। वे महज़ एक संगीतकार नहीं, बल्कि एक ‘सोनिक आर्किटेक्ट’ (ध्वनि वास्तुकार) हैं, जिन्होंने भारतीय संगीत के डीएनए को हमेशा के लिए पुनर्जीवित कर दिया।

1992 से 2015 तक का वह सुनहरा दौर था, जब किसी एल्बम पर रहमान का नाम होना ही उसकी सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता था। उनका संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की पहचान बन गया और उनके गीत ‘कल्चरल एंथम्स’ की तरह गूंजने लगे। लेकिन हाल ही में रहमान ने एक टीस भरा खुलासा किया कि पिछले आठ वर्षों में बॉलीवुड ने उनसे दूरी बना ली है। उनका आरोप था कि अब फैसले रचनात्मक लोगों के बजाय उन लोगों के हाथों में हैं, जो कला की गहराई नहीं समझते। यह सिर्फ एक कलाकार का दर्द नहीं, बल्कि समूचे फिल्म उद्योग की गिरती साख पर एक गंभीर कटाक्ष था।

इसे भी पढ़ें: Bigg Boss 19 विनर Gaurav Khanna ने पत्नी आकांक्षा के लिए रखी ग्रैंड बर्थडे पार्टी, सितारों का लगा जमावड़ा

मगर यहाँ एक कड़वा सच यह भी है कि इस फीके पड़ते जादू के पीछे कहीं न कहीं रहमान स्वयं भी जिम्मेदार हैं। फिल्म ‘तमाशा’ (2015) के बाद से उनका संगीत न केवल अस्थिर हुआ है, बल्कि वह उस प्रभाव को छोड़ने में भी नाकाम रहा है जिसके लिए वे जाने जाते थे। उनका हालिया काम काफी हद तक भुला देने योग्य सा प्रतीत होता है।

70 के दशक में जैसा रुतबा बच्चन का था, वही रुतबा 1992 से 2015 तक रहमान का रहा। उनके नाम मात्र से फिल्म को एक नई ऊंचाई और बॉक्स ऑफिस पर सफल होने का भरोसा मिलता था। रहमान की धुनें सिर्फ गाने नहीं थीं, वे एक राष्ट्रीय उत्सव की तरह थीं।

जब रहमान ने बॉलीवुड में काम की कमी का श्रेय ‘गैर-रचनात्मक सिंडिकेट’ को दिया, तो इंडस्ट्री में खलबली मच गई। लेकिन गहराई से देखें तो यह गिरावट केवल बाहरी नहीं है। ‘तमाशा’ के बाद से उनके संगीत में वह मौलिकता और निरंतरता कम ही दिखी है, जो कभी उनकी पहचान हुआ करती थी।

इसे भी पढ़ें: ‘मेरी छोटी नूप्स अब पराई हो गई’, बहन नूपुर की शादी के बाद Kriti Sanon का भावुक पोस्ट, याद किए बचपन के दिन

सच्चाई यह है कि रहमान अपने बॉलीवुड ग्राफ में आई इस गिरावट के लिए आत्मचिंतन के घेरे में भी आते हैं। उनका हालिया काम उनके पुराने स्तर को छूने में संघर्ष करता दिखाई देता है।

एक स्वर-क्रांति का उदय

रहमान के आगमन से पहले, बॉलीवुड संगीत काफी हद तक नकल और पूर्वानुमानों पर आधारित था। अनु मलिक, आनंद मिलिंद और विजू शाह जैसे संगीतकारों ने वैश्विक धुनों और यहाँ तक कि दक्षिण के दिग्गज इलैयाराजा के संगीत को भी बेहिचक कॉपी किया था।

विडंबना देखिए, बॉलीवुड ने शुरुआत में रहमान की मौलिक रचनाओं को भी नहीं बख्शा। फिल्म ‘द जेंटलमैन’ के लिए अनु मलिक ने रहमान के तमिल ट्रैक की हूबहू नकल की और जब उन पर चोरी के आरोप लगे, तो उन्होंने बड़ी चतुराई से कहा—’क्या दो महान प्रतिभाएं एक जैसा नहीं सोच सकतीं?’

‘रोजा’ के साथ भारतीय संगीत का परिदृश्य रातों-रात बदल गया। अगले दो दशकों तक रहमान एक ब्रांड बन गए। उनका संगीत फिजाओं में तैरने लगा; टैक्सी से लेकर शादियों तक और हर घर के ड्राइंग रूम में उनके गाने लूप पर बजते थे। उन्होंने फिल्म को एक ऐसा आर्थिक और कलात्मक आधार दिया, जो विरले ही किसी संगीतकार के हिस्से आता है।

रहमान की धुनें लोगों के जीवन का बैकग्राउंड स्कोर बन गईं—चाहे वह पहली डेट हो, लंबी सड़क यात्रा हो, टूटे हुए दिल का दर्द हो या देशभक्ति का जुनून। ‘बॉम्बे’ से ‘दिल से’ और ‘लगान’ से ‘रॉकस्टार’ तक, रहमान ने केवल हिट चार्टबस्टर्स नहीं दिए, बल्कि वे यादें रचीं जो दशकों तक अमर रहेंगी।

हालाँकि, इसी बीच उन्होंने ‘ओके जानू’ जैसे प्रोजेक्ट्स में अपने ही पुराने काम को ‘रीसायकल’ करना शुरू किया। संगीत सुनने में बुरा नहीं था, लेकिन उसमें वह नवीनता गायब थी जो कभी रहमान का हस्ताक्षर हुआ करती थी।

जैसे अमिताभ बच्चन के करियर में एक ऐसा दौर आया जब उनके सबसे कट्टर प्रशंसकों ने भी उनकी फिल्मों से मुंह मोड़ लिया और ‘लाल बादशाह’ जैसी फिल्में उनके कद के आगे छोटी लगने लगीं; ठीक वैसा ही रहमान के वफादारों के साथ हो रहा है। ‘तमाशा’ के बाद का यह दौर उनके संगीत के गिरते ग्राफ और औसत दर्जे की रचनाओं की गवाही दे रहा है, जो संगीत प्रेमियों के लिए एक कड़वा अनुभव है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *