अदृश्य धागे जो हमारे विचारों को खींचते हैं: भारत में मनोविज्ञान और सामाजिक व्यवहार की पड़ताल
हमारे चारों ओर, अनजाने में ही, ऐसे अदृश्य धागे बुने हुए हैं जो हमारे विचारों और प्रतिक्रियाओं को आकार देते हैं। भारत में मनोविज्ञान और सामाजिक व्यवहार पर हो रही हालिया चर्चाओं ने इस बात को और भी स्पष्ट कर दिया है। यह समझना रोमांचक है कि कैसे बाहरी संकेत, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, हमारे निर्णय लेने की प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।
’12 पर पर्सन’ का जादू: सुपरमार्केट से लेकर हमारे दिमाग तक
एक दिलचस्प मिसाल 2017 में ‘द न्यू यॉर्कर’ में छपी एक रिपोर्ट से मिलती है। एक सुपरमार्केट ने “12 पर पर्सन” का एक साधारण बोर्ड लगाकर अपनी सूप की बिक्री को दोगुना कर दिया था! यह प्रभाव मनोविज्ञान की दुनिया में ‘एंकरिंग’ और ‘प्राइमिंग’ के नामों से जाना जाता है। ‘प्राइमिंग’ का असर इतना सूक्ष्म हो सकता है कि व्यक्ति को इस बात का एहसास भी नहीं होता कि उसके व्यवहार में बदलाव आ रहा है।
दिल्ली की फ्लाइट पर एक अक्षर का अंतर: पूर्वाग्रह की दस्तक?
भारत में, इस मनोवैज्ञानिक अवधारणा को एक हालिया घटना ने और भी रोचक बना दिया। जुलाई में, दिल्ली से कोच्चि जाने वाली फ्लाइट के दो पत्रकारों के टिकट में नाम की मामूली सी गलती हुई। एक का नाम सिद्धार्थ वरदराजन था, तो दूसरे का ज़िया उस सलाम। सिर्फ एक अक्षर का अंतर, लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान CISF गार्ड्स ने एक पत्रकार को आसानी से अंदर जाने दिया, जबकि दूसरे को रोक दिया। यह चौंकाने वाला था कि दोनों के बीच एक हिंदू और एक मुस्लिम का अंतर था। वरदराजन ने एक मनोवैज्ञानिक प्रयोग की तरह सवाल पूछा: “सोचिए किसे अंदर जाने दिया गया होगा?”
जेमिमा रोड्रिग्स का प्रदर्शन और सोशल मीडिया का कटघरा: विश्वास या नफरत?
भारतीय महिला क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्स का हालिया प्रदर्शन और उनसे जुड़ा विवाद भी इस बहस को फिर से गरमा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में 127 रनों की नाबाद पारी खेलकर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनने के बाद, रोड्रिग्स ने मैदान पर भावुक होकर अपनी संघर्ष भरी यात्रा और ईश्वर में अपने विश्वास का जिक्र किया।
लेकिन, इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद, रोड्रिग्स को सोशल मीडिया पर तब निशाना बनाया गया जब उन्होंने जीसस को धन्यवाद दिया। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि 2024 में उनके पिता पर कथित धर्मांतरण के आरोप लगे थे, जिसके कारण उनकी क्लब सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी। इस घटना ने सोशल मीडिया पर धार्मिक नफरत और विवाद को फिर से उजागर कर दिया। जहाँ एक ओर कई लोग रोड्रिग्स की प्रशंसा कर रहे थे, वहीं कुछ ने उन्हें “धर्म की राजनीति” से जोड़ने का प्रयास किया। कई लोगों ने खेल को राजनीति से दूर रखने की बात कही, लेकिन यह सवाल अब भी अनसुलझा है कि आखिर हमें ऐसी सोच की ओर क्या प्रेरित करता है।
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