मनोरंजन की दुनिया से एक दुखद विदाई: राजवीर जवंदा, जिसने गायकी के लिए छोड़ी पुलिस की नौकरी
पंजाबी संगीत उद्योग का एक उभरता सितारा, 35 वर्षीय राजवीर जवंदा, 8 अक्टूबर, 2025 को एक दर्दनाक मोटरसाइकिल दुर्घटना में हमेशा के लिए खामोश हो गया। हिमाचल प्रदेश के बद्दी में 27 सितंबर को हुई इस दुर्घटना के बाद, राजवीर 11 दिनों तक मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहे, लेकिन अंततः वे हार गए।
उनकी पत्नी, अशविंदर कौर, ने अंतिम समय में एक चेतावनी दी थी, जो दुर्भाग्यवश सच साबित हुई। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजवीर ने गायन के प्रति अपने जुनून के लिए पंजाब पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी? आइए, जानते हैं उनके जीवन का वो निर्णायक मोड़, जब उन्होंने पुलिस की वर्दी को त्याग कर माइक को थामा।
राजवीर जवंदा ने पुलिस की नौकरी क्यों छोड़ी?
लुधियाना के पौना गांव में जन्मे राजवीर जवंदा के पिता, करम सिंह जवंदा, स्वयं पंजाब पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर थे। इसी पृष्ठभूमि ने स्वाभाविक रूप से राजवीर को भी पुलिस सेवा की ओर आकर्षित किया। 2011 में, राजवीर जगरांव में एक कांस्टेबल के रूप में नियुक्त हुए। लेकिन, गायन का जुनून उनमें बचपन से ही था। दूरदर्शन की एक टीम ने उनके गांव में उनकी प्रस्तुति को देखकर खूब सराहा था, जिसके बाद राजवीर ने रियाज को और गंभीरता से लेना शुरू किया।
पुलिस की ड्यूटी निभाते हुए भी, राजवीर स्टेज शो करते रहे। 2014 में उनका पहला सिंगल ‘मुंडा लाइक मी’ रिलीज़ हुआ, जिसने अपार सफलता हासिल की। ‘कंगनी’, ‘सर्दारी’, ‘रब कर के’ जैसे गानों ने उन्हें पंजाबी संगीत जगत में एक स्थापित कलाकार बना दिया। 2019 में, जब उनका गायन करियर पूरी तरह जम चुका था, राजवीर ने 8 साल की पुलिस की नौकरी को अलविदा कह दिया। उनके एक करीबी दोस्त ने बताया, “राजवीर ने कहा था – ‘पुलिस में मैंने पूरी लगन से ड्यूटी की, लेकिन गायन मेरा जुनून है। अब यही मेरी मंजिल है।'” उनकी पत्नी, अशविंदर कौर, ने इस साहसिक निर्णय में उनका पूरा साथ दिया।
राजवीर जवंदा की पत्नी की आखिरी पुकार: अगर बात मानी होती, तो आज ज़िंदा होते राजवीर!
27 सितंबर, 2025 को, राजवीर अपनी 27 लाख की BMW 1300cc बाइक पर शिमला के लिए रवाना हो रहे थे। बाइकिंग उनका एक प्रिय शौक था, और वे अक्सर पहाड़ों में कैंपिंग के लिए जाते थे। उस दिन, उनकी पत्नी अशविंदर ने उनसे कहा, “आज मत जाओ, मेरा मन बेचैन है।” लेकिन राजवीर अपने 5 दोस्तों के साथ निकल पड़े। बद्दी के पास, एक सांड से बचने की कोशिश में, उनकी बाइक एक गाड़ी से टकरा गई। सिर और रीढ़ की गंभीर चोटों के साथ-साथ, रास्ते में उन्हें दो दिल के दौरे भी पड़े।
सोलन के सिविल अस्पताल से उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में शिफ्ट किया गया। 3 अक्टूबर को एमआरआई में, मस्तिष्क को ऑक्सीजन की कमी से स्थायी क्षति का पता चला। 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर जीवन से संघर्ष करने के बाद, 8 अक्टूबर की सुबह 10:50 बजे उनका निधन हो गया।
राजवीर जवंदा के बच्चों के नाम: पीछे छूट गए पत्नी और बच्चे!
राजवीर अपनी पत्नी अशविंदर कौर, 5 वर्षीय बेटी हेमंत कौर और 3 वर्षीय बेटे दिलावर सिंह को पीछे छोड़ गए हैं। उनकी मां परमजीत कौर (पूर्व सरपंच) और बहन कमलजीत कौर भी उनके साथ हैं। दादा सौदागर सिंह और पिता का निधन पहले ही हो चुका था। राजवीर का एक सपना था – बच्चों के साथ शिमला में एक पारिवारिक यात्रा का। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना उनके सभी सपनों को निगल गई। किसान आंदोलन (2020-21) के दौरान, उन्हें स्टेज पर अपने पिता की मृत्यु की खबर मिली थी, फिर भी उन्होंने अपना गाना पूरा किया था। यह उनकी जिम्मेदारी और जुनून का एक ज्वलंत उदाहरण था।
जुनून की जीत, लेकिन ज़िंदगी की हार
राजवीर जवंदा ने पुलिस की सुरक्षित नौकरी को छोड़कर गायन का रास्ता चुना, और लाखों दिलों में अपनी जगह बनाई। लेकिन, नियति का एक क्रूर मोड़ उनकी साँसों को छीन ले गया। पंजाब के मुख्यमंत्री ने 10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। उनके प्रशंसक कह रहे हैं – ‘राजवीर की आवाज़ हमेशा अमर रहेगी।’ RIP राजवीर।
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