यूपी में 16.18 लाख वोटर जोड़ने के आरोप पर चुनाव आयोग की सफाई, नवदीप रिणवा ने बताई पूरी प्रक्रिया

By
PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
- Editor
5 Min Read
यूपी में 16.18 लाख वोटर जोड़ने के आरोप पर चुनाव आयोग की सफाई, नवदीप रिणवा ने बताई पूरी प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में 16.18 लाख नाम जोड़ने को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। आखिर फॉर्म-6 और फॉर्म-9 का पूरा मामला क्या है और चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या जवाब दिया

उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16.18 लाख फॉर्म-6 को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा किसी जांच में सामने आई नई जानकारी नहीं है, बल्कि इसे चुनाव विभाग ने पहले ही सार्वजनिक किया था।

उन्होंने कहा कि 6 जनवरी के बाद से ही इस संबंध में जानकारी दी जा रही थी। ऐसे में आंकड़े को इस तरह पेश करना कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता सामने आई है, सही नहीं है। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित कानून और नियमों के अनुसार संचालित की गई।

फॉर्म-6 और फॉर्म-9 में क्या अंतर है?

नवदीप रिणवा ने बताया कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकता है। यह आवेदन नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है।

हालांकि, ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद निर्धारित अवधि में प्राप्त फॉर्म-6 आवेदनों की अलग सूची तैयार की जाती है, जिसे फॉर्म-9 कहा जाता है। अधिकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 6 जनवरी से 6 मार्च तक की अवधि से संबंधित आवेदनों की सूची नियमों के तहत प्रकाशित की गई।

वेबसाइट पर जानकारी सार्वजनिक करने पर भी सवाल

मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाने के बाद सवाल उठे कि कुछ आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया गया, जबकि पहले प्राप्त आवेदनों को लेकर वैसी जानकारी क्यों नहीं दिखाई गई।

इस पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया का हर चरण कानून और नियमों से निर्धारित होता है। इसलिए अलग-अलग समय पर प्राप्त आवेदनों और उनके प्रकाशन की प्रक्रिया को उन्हीं प्रावधानों के आधार पर समझना चाहिए।

भ्रम फैलाने वालों पर अधिकारी का पलटवार

नवदीप रिणवा ने आरोप लगाया कि आम लोगों को चुनावी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी के साथ पूरी की गई है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे पात्र लोगों की मदद करें, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।

गलत नाम जुड़ने या कटने पर क्या कर सकते हैं मतदाता?

चुनाव अधिकारी के मुताबिक, यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वह अब भी फॉर्म-6 भर सकता है। वहीं, किसी व्यक्ति को लगता है कि सूची में गलत तरीके से नाम जोड़ा गया है या किसी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया है, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आपत्ति या अपील कर सकता है।

रिणवा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के बाद करीब 700 से 750 अपीलें आई हैं। उन्होंने इसे प्रक्रिया के सही तरीके से संपन्न होने के संदर्भ में रखा।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर टिकी नजरें

16.18 लाख फॉर्म-6 का आंकड़ा अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसकी वास्तविक स्थिति समझने के लिए आवेदनों की तारीख, पात्रता, स्वीकृति और प्रकाशित सूचियों का संदर्भ देखना जरूरी है।

चुनाव आयोग ने नियमों के पालन का दावा किया है, जबकि सवाल उठाने वालों के लिए कानूनी आपत्ति का रास्ता खुला है। आखिरकार, लोकतंत्र में मतदाता सूची की विश्वसनीयता केवल दावों से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रक्रिया और तथ्यों की जांच से मजबूत होती है।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *