JPSC परीक्षा रद्द मामला: हाईकोर्ट में सरकार के फैसले पर तीखे सवाल, क्या आज आएगा बड़ा फैसला?
रांची: झारखंड की कानूनी चौखट पर आज हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर बहस तेज है। राज्य सरकार द्वारा जेपीएससी की 22 परीक्षाओं को एक साथ रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को भी झारखंड हाईकोर्ट में गहमागहमी बनी रही। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में प्रार्थियों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने सरकार के इस कदम को कड़ी चुनौती दी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों की नजीरों का हवाला देते हुए सरकार के इस विवादास्पद आदेश को तुरंत निरस्त करने की मांग की।
राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला?
अदालत को बताया गया कि 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए उन परीक्षाओं को भी रद्द कर दिया गया, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया या तो पूरी हो चुकी थी या फिर अपने अंतिम पड़ाव पर थी। वकीलों ने तर्क दिया कि सरकार के पास इस सामूहिक रद्दीकरण के पीछे कोई ठोस आधार या सबूत नहीं थे; यह फैसला केवल आंदोलन कर रहे छात्रों के ‘राजनीतिक दबाव’ में आकर लिया गया है।
‘प्राकृतिक न्याय’ की अनदेखी का आरोप
बहस के दौरान ‘नेचुरल जस्टिस’ (प्राकृतिक न्याय) का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि राज्य सरकार ने निर्धारित सेवा शर्त नियमावली और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा में कहीं गड़बड़ी की आशंका होती भी है, तो सिद्धांत यह कहता है कि ‘दोषी’ और ‘निर्दोष’ अभ्यर्थियों को अलग (Segregate) किया जाना चाहिए। पूरी परीक्षा को सिरे से खारिज करना उन ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है जिन्होंने अपनी मेहनत से सफलता पाई थी।
JSSC और JPSC: आज आ सकता है निर्णायक आदेश
झारखंड के युवाओं के लिए आज का दिन काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने महज एक दिन पहले यानी गुरुवार को जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा रद्द करने से जुड़े मामले की भी सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। कानूनी गलियारों में यह प्रबल संभावना जताई जा रही है कि अदालत इन दोनों हाई-प्रोफाइल मामलों में आज ही अपना आदेश सुना सकती है।
इस सुनवाई के साथ-साथ राज्य की अन्य गतिविधियों पर भी नजर है, जहां लातेहार में आदिवासी महिला की पिटाई के मामले में सीएम हेमंत सोरेन ने जांच के निर्देश दिए हैं, वहीं मेदिनीनगर कोर्ट में एक फरार आरोपी ने सरेंडर किया है।
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