बिहार चुनाव 2020: नीतीश कुमार का विकास मंत्र और कल्याणकारी योजनाओं का दांव
बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने वाले मतदान और 14 नवंबर को नतीजे घोषित होने के साथ, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने 20 साल के शासनकाल की उपलब्धियों को उजागर करते हुए एक आक्रामक अभियान छेड़ दिया है। साथ ही, उन्होंने प्रमुख मतदाता वर्गों को लुभाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की भी घोषणा की है।
मुज़फ़्फ़रपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, नीतीश कुमार ने 2005 से पहले के बिहार की भयावह तस्वीर को सामने रखते हुए, अपने नेतृत्व में हुए विकास कार्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “लोग शाम को घर से बाहर निकलने से भी डरते थे। अराजकता का माहौल था, शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही थी, और सड़कें व बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी दुर्लभ थीं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन जब हमें सेवा का मौका मिला, तो हमने सभी के कल्याण के लिए काम किया। आज बिहार में शांति, भाईचारा और विकास है।”
रोजगार के मोर्चे पर भी नीतीश कुमार ने बड़ा वादा किया है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और अगले पांच सालों में एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अपनी पुरानी ‘मुफ्त रेवड़ी’ की आलोचनाओं के बावजूद, नीतीश कुमार ने विपक्ष के कुछ वादों के जवाब में, लक्षित कल्याणकारी योजनाओं को अपनाया है। 125 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा मतदाताओं को आकर्षित करने का एक प्रभावी तरीका साबित हो सकता है। इसके अलावा, सरकार ने कल्याण कार्यकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण सहायता की घोषणा की है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने वाले 10,000 से अधिक ‘विकास मित्रों’ को टैबलेट खरीदने के लिए 25,000 रुपये का एकमुश्त भत्ता मिलेगा। उनके मासिक परिवहन भत्ते को 1,900 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये और स्टेशनरी भत्ते को 900 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। साथ ही, महादलित, अल्पसंख्यक और अत्यंत पिछड़े समुदायों के बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने में मदद करने वाले 30,000 से अधिक शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज़ों को स्मार्टफोन खरीदने के लिए 10,000 रुपये दिए जाएंगे।
राजनीतिक परिदृश्य: जदयू और भाजपा का शक्ति संतुलन
जहाँ नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) बिहार की राजनीति में एक मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की है। विशेष रूप से 2020 के चुनावों में, भाजपा ने जीती हुई सीटों और वोट शेयर दोनों में जदयू से बेहतर प्रदर्शन किया। पिछले चुनावों के रुझान बिहार में भाजपा की बढ़ती चुनावी पैठ का संकेत देते हैं, जबकि जदयू का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा है, हालांकि हाल के चुनावों में इसमें गिरावट देखी गई है। यह चुनावी गणित आने वाले समय में बिहार के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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