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सलेम पर अटकी पैरोल: महाराष्ट्र सरकार ने की रिहाई से इनकार, डरा रही भारत-पुर्तगाल रिश्तों पर आंच की आशंका
गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई की राह एक बार फिर बाधाओं से घिरती नजर आ रही है। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने स्पष्ट कर दिया है कि उसे पैरोल पर रिहा करने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। सरकार ने अदालत को बताया कि अगर सलेम को जेल से बाहर किया गया, तो उसके देश से फरार होने का खतरा है, जिससे भारत और पुर्तगाल के बीच राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है।
यह मामला मंगलवार को न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और श्याम चंदक की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। महाराष्ट्र सरकार ने अदालत में दाखिल एक हलफनामे के जरिए अबू सलेम की उस अर्जी का कड़ा विरोध किया, जिसमें उसने अपने बड़े भाई की मृत्यु के बाद 14 दिनों की पैरोल मांगी थी। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अगर किसी परिस्थितिवश अदालत उसे कोई राहत देना भी चाहती है, तो वह केवल एक आपातकालीन पैरोल होनी चाहिए और अधिकतम दो दिनों तक ही सीमित होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी अपना पक्ष रखा। सीबीआई ने कहा कि वह इस मामले में अभियोजन पक्ष है और उसे इस केस में प्रतिवादी के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, सीबीआई ने यह चेतावनी भी दी कि इस खतरनाक अपराधी को जमानत या पैरोल देने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
प्रत्यर्पण की गारंटी का मुद्दा
जेल महानिरीक्षक सुहास वार्के द्वारा दाखल किए गए हलफनामे ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। हलफनामे में कहा गया है कि अबू सलेम एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी है जो दशकों से संगठित अपराध से जुड़ा रहा है। उसे पुर्तगाल से भारत लाने के लिए एक विशेष प्रत्यर्पण संधि का सहारा लिया गया था, जिसमें भारत सरकार ने कुछ विशिष्ट गारंटी दी थीं। हलफनामे में जोर देकर कहा गया है कि भारत उस समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए बाध्य है।
सरकार ने अदालत को यह भी आगाह किया कि यदि सलेम पैरोल पर रहते हुए फरार हो जाता है, तो इससे न केवल भारत-पुर्तगाल के बीच गंभीर राजनयिक समस्याएं पैदा होंगी, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा होगा। राज्य ने यह भी याद दिलाया कि सलेम 1993 में गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले ही भारत से भाग चुका है, जिससे यह आशंका और बलवती होती है कि वह दोबारा ऐसा कर सकता है। गौरतलब है कि सलेम को नवंबर 2005 में लिस्बन में गिरफ्तार किया गया और भारत वापस लाया गया था, जहां पुर्तगाल में उसे फर्जी पासपोर्ट पर यात्रा करने का दोषी पाया गया था।
अदालत ने इस मामले की आगे की सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है।
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