मतुआ समुदाय की नागरिकता का मुद्दा गरमाया: अधीर रंजन चौधरी ने अमित शाह से लगाई गुहार
पश्चिम बंगाल के मतुआ समुदाय के लिए नागरिकता का सवाल एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस समुदाय को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत कठोर दस्तावेज़ी आवश्यकताओं से छूट देने और उनकी वैध नागरिकता को औपचारिक रूप से मान्यता देने की तत्काल मांग की है।
चौधरी ने गुरुवार को ठाकुरनगर स्थित अनशन स्थल का दौरा कर मतुआ समुदाय के सदस्यों के दर्द और भविष्य को लेकर उनकी गहरी चिंता को प्रत्यक्ष रूप से समझा। उन्होंने अनशनरत समुदाय को न्याय के उनके संघर्ष में पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
अपने पत्र में, चौधरी ने रेखांकित किया कि मतुआ समुदाय, जो दशकों पहले पूर्वी पाकिस्तान से गंभीर उत्पीड़न झेलकर भारत आए थे, वे भारतीय समाज का अभिन्न अंग बन चुके हैं। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2014 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 करने के सरकार के फैसले का हवाला देते हुए, लंबे समय से बसे मतुआ समुदाय के लिए भी ऐसे ही मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले उनकी नागरिकता सुनिश्चित करने और विधानसभा तथा संसदीय चुनावों में उनके मताधिकार की रक्षा के लिए एक अध्यादेश लाने की मांग की। चौधरी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जो समुदाय दशकों से चुनावों में सक्रिय रहा है और अपने प्रतिनिधियों को संसद और विधानसभाओं में भेजा है, वह अब लगभग 25 साल पुराने दस्तावेज पेश न कर पाने के कारण अपना मताधिकार खोने के खतरे का सामना कर रहा है। यह स्थिति उनके लिए एक बड़ा अन्याय है।
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