बिहार की राजनीति में भूचाल: चुनाव से पहले नेताओं का ‘महा-दंगल’, सीट बंटवारे पर घमासान
बिहार में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक फिज़ाएं गर्म हो चली हैं। नेताओं का दलबदल अपने चरम पर है, जहाँ पुराने दलों को अलविदा कहने के साथ-साथ उन पर तीखे वार भी हो रहे हैं। इस बीच, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) अपने सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे के फ़ॉर्मूले को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शुक्रवार को संकेत दिया कि शनिवार शाम तक यह घोषणा हो सकती है। उन्होंने बताया कि सीट बंटवारे पर आम सहमति बन चुकी है और औपचारिक घोषणा पटना या दिल्ली में की जाएगी।
राजद में सेंधमारी का दावा, इस्तीफों का सिलसिला जारी
जायसवाल ने यह भी दावा किया कि आने वाले दो दिनों में राजद के छह से अधिक विधायक भाजपा का दामन थाम सकते हैं। शुक्रवार को ही, राजद के दो विधायक – भरत बिंद और संगीता कुमारी – ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने स्वीकार कर लिया। बभुआ से विधायक भरत बिंद और मोहनिया से विधायक संगीता कुमारी, दोनों ने फरवरी 2024 के शक्ति परीक्षण में एनडीए सरकार का समर्थन किया था। वहीं, विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने पार्टी व्हिप के उल्लंघन के बावजूद इन विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए हैं।
चिराग की पार्टी की अहम बैठक, सीट बंटवारे पर मंथन
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने एनडीए के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को एक बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि चिराग का भाजपा के साथ सीटों को लेकर समझौता लगभग तय हो गया है।
‘जदयू’ को झटके पर झटके, राजद का बढ़ता दबदबा
पूर्णिया से जदयू के दो बार के सांसद रहे संतोष कुशवाहा ने शुक्रवार को राजद का हाथ थाम लिया। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल करने वाले कुशवाहा, 2024 में पप्पू यादव से हार गए थे और उन्होंने इस हार के लिए भाजपा और जदयू के स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहराया था। इसके अलावा, जदयू के पूर्व विधायक राहुल शर्मा, जो 2015 से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज बताए जाते हैं, भी राजद में शामिल हो गए हैं। खगड़िया के परबत्ता से जदयू विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने भी पिछले सप्ताह राजद की सदस्यता ग्रहण की और नीतीश सरकार को “बिहार के इतिहास की सबसे भ्रष्ट सरकारों में से एक” करार दिया। हालांकि, जदयू सूत्रों का कहना है कि सिंह के दल बदलने का मुख्य कारण उनकी सीट पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भाई को टिकट मिलने की प्रबल संभावना थी।
गठबंधन में हलचल, कांग्रेस भी पीछे नहीं
जहां एक ओर जदयू को झटके लग रहे हैं, वहीं राजद और कांग्रेस के भी कई विधायक भाजपा या जदयू का रुख कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल के अनुसार, महागठबंधन के एक दर्जन विधायक पाला बदलने को तैयार बैठे हैं और भाजपा के संपर्क में हैं।
सीट बंटवारे पर अंतिम चरण में चर्चा, ‘अड़चनों’ की भी उम्मीद
दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर तेज हो गया है, हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने अंतिम फॉर्मूले की घोषणा नहीं की है। भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल के अनुसार, शनिवार को दिल्ली में अंतिम घोषणा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, राजद गठबंधन में मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) द्वारा अधिक सीटों की मांग को लेकर “एक मामूली अड़चन” शेष है।
चिराग की सीट की मांग में नरमी, एनडीए की बातचीत अंतिम चरण में
भाजपा सूत्रों के अनुसार, एनडीए की सीट-बंटवारे की बातचीत दिल्ली में अंतिम चरण में है। चिराग पासवान ने अपनी शुरुआती 40 सीट की मांग को घटाकर लगभग 25 पर सहमति जता दी है। इस विषय पर केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और चुनाव प्रभारी बीते दो-तीन दिनों से चिराग पासवान से बैठक कर रहे थे।
बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। ऐसे में, नेताओं का यह ‘महा-दंगल’ चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा रहा है।
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