दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला: छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि, अटेंडेंस नियमों पर सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि छात्रों पर थोपे गए कड़े उपस्थिति नियम उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकते हैं और यहाँ तक कि वे आत्महत्या जैसी गंभीर घटनाओं का कारण भी बन सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी युवा जीवन की कीमत सिर्फ़ उपस्थिति के कठोर नियमों के आगे नहीं झुकाई जा सकती।
परीक्षा से रोकने से बेहतर, नियमों में नरमी की तलाश
अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोकने जैसे कठोर कदम उठाने के बजाय, शैक्षणिक संस्थानों को कम कठोर और अधिक लचीले नियमों की तलाश करनी चाहिए। यह छात्रों की भलाई और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
शिकायत निवारण आयोग (GRC) का गठन अनिवार्य, छात्रों को मिलेगी ज़्यादा आवाज़
कोर्ट ने एक और अहम निर्देश जारी किया है। अब सभी लॉ कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के लिए शिकायत निवारण आयोग (GRC) का गठन अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि इस आयोग के 51 प्रतिशत सदस्य छात्र होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को अपने नियमों में संशोधन करना होगा। यह कदम छात्रों को अपनी समस्याओं और चिंताओं को खुलकर व्यक्त करने का एक मंच प्रदान करेगा और उनकी आवाज़ को अधिक महत्व देगा।
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