शीतकालीन ओलंपिक (2026) में भारत की भागीदारी पर अचानक कानूनी ब्रेक लग गया है। मिलान और कोर्टिना में होने वाले इस महाकुंभ से ठीक पहले, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) द्वारा किए गए चयन पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।
मामला क्रॉस-कंट्री स्कीयर मंजीत से जुड़ा है, जिन्होंने अपने ही साथी एथलीट स्टांजिन लुंडुप के चयन को अदालत में चुनौती दी है। मंजीत का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय स्की महासंघ (FIS) की रैंकिंग में वह लुंडुप से बेहतर स्थान पर होने के बावजूद भी उन्हें नजरअंदाज किया गया। मंजीत ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और हितों के टकराव जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
गौरतलब है कि यह चयन IOA द्वारा स्की एंड स्नोबोर्ड इंडिया के संचालन के लिए गठित तदर्थ समिति ने किया था। भारत ने 2026 ओलंपिक के लिए दो कोटे हासिल किए हैं, जिनमें से एक अल्पाइन स्कीयर आरिफ खान ने अपनी विश्व रैंकिंग के आधार पर पहले ही अर्जित कर लिया है।
न्यायमूर्ति अमित शर्मा की एकल पीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि 27 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों का नाम भेजना इस मुकदमे के परिणाम पर निर्भर करेगा। इस बीच, खेल मंत्रालय ने अदालत में यह भी दलील दी कि क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में भारत को कोटा कैसे मिला, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है क्योंकि सार्वजनिक डोमेन में इसका कोई आधिकारिक ब्यौरा उपलब्ध नहीं है।
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