ECI की SC में गवाही: बिहार SIR मामले में केवल मनगढ़ंत कहानियों का पर्दाफाश

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ECI की SC में गवाही: बिहार SIR मामले में केवल मनगढ़ंत कहानियों का पर्दाफाश
Bihar SIR hearing: केवल कहानी गढ़ने पर ध्यान, SIR मामले में सुनवाई के दौरान ECI ने सुप्रीम कोर्ट में कही बड़ी बात

चुनाव आयोग का सनसनीखेज खुलासा: क्या चुनाव प्रक्रिया को दिग्भ्रमित करने का हो रहा है प्रयास?

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक विशेष गहन पुनरीक्षण (एससीआर) मामले की सुनवाई के दौरान, भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने एक ऐसा आरोप लगाया है जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। चुनाव आयोग का कहना है कि कुछ राजनीतिक दल और उनसे जुड़ी एजेंसियां, चुनाव निकाय के महत्वपूर्ण प्रयासों में सहयोग करने के बजाय, जनता की राय को प्रभावित करने और एक खास नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही हैं। यह सीधा आरोप है कि वे ‘नैरेटिव सेट’ करना चाहते हैं, जो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

दावों का खंडन और हकीकत की तलाश

सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग के वकील ने याचिकाकर्ताओं के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एक व्यक्ति को ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने अदालत को सूचित किया कि दिए गए पतों पर ऐसे किसी व्यक्ति के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं मिला है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी इस बात पर जोर दिया कि ऐसे व्यक्ति के होने का कोई भी सबूत पेश नहीं किया गया है। अधिवक्ता द्विवेदी ने आगे तर्क दिया कि याचिकाकर्ता, जो कि एक गैर-सरकारी संगठन से जुड़े हैं, अदालत में हलफनामा दाखिल करने से पहले अपने दावों की सत्यता की पुष्टि करने में विफल रहे हैं।

बिहार में मतदाताओं की सूची से बड़ी तादाद में नाम गायब: चिंताजनक आंकड़े

इस बीच, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। उनके अनुसार, बिहार में मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी कमी देखी गई है, जो 47 लाख तक पहुंच गई है। सितंबर 2025 तक बिहार में वयस्क आबादी का आधिकारिक अनुमान 8.22 करोड़ था, जिन्हें मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए था। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 7.42 करोड़ रह गई है। इसका मतलब है कि 80 लाख यानी बिहार की कुल वयस्क आबादी का लगभग 10% मतदाता अपने मताधिकार से वंचित रह गए हैं। वयस्क आबादी और मतदाताओं के अनुपात में इतनी भारी गिरावट न केवल बिहार के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक रिकॉर्ड है। देश के किसी भी राज्य में इससे पहले कभी भी 10% से अधिक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर: 3.66 लाख मतदाताओं के गायब होने का रहस्य

सुप्रीम कोर्ट चुनावी राज्य बिहार में एसआईआर कराने के चुनाव आयोग के 24 जून के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपनी सुनवाई जारी रखे हुए है। 7 अक्टूबर, 2025 को, अदालत ने चुनाव आयोग से उन 3.66 लाख मतदाताओं का विस्तृत विवरण मांगा था, जो मसौदा मतदाता सूची का हिस्सा थे, लेकिन एसआईआर के बाद तैयार की गई अंतिम सूची से बाहर हो गए थे। कोर्ट ने इस मामले में मौजूद ‘भ्रम की स्थिति’ को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया है। यह पूरा मामला अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी को इंतजार है।


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