अंधेरों को चीरती उम्मीदें: नेत्रम फाउंडेशन देगा दृष्टिबाधितों को आत्मनिर्भरता का पंख!
दरभंगा, एक ऐसी पहल जो आंखों के न होने के बावजूद जीवन को रौशन करने का वादा करती है। नेत्रम फाउंडेशन, स्याह ज़िंदगी जीने वाले दृष्टिबाधितों को आत्मनिर्भर बनाने के मिशन पर निकला है। उनकी पहली आधिकारिक बैठक में, एक क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है – अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण! यह सिर्फ एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम है।
कटहलबाड़ी स्थित मीरा निवास में, फाउंडेशन के अध्यक्ष सह राजकीय नेत्रहीन उवि के प्रभारी एचएम राकेश किरण झा की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में, ट्रस्टी अमित मिश्रा, दृष्टिबाधित उज्जवल कुमार, और रेलवे सेवा में कार्यरत दृष्टिबाधित प्रवीण चौधरी जैसे समर्पित सदस्यों ने भाग लिया। वर्चुअल माध्यम से अरविंद कुमार ठाकुर ने भी इस चर्चा में अपना योगदान दिया।
यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि नेत्रम फाउंडेशन के माध्यम से दृष्टिबाधित युवाओं के लिए अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण का निशुल्क प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। यह पहल न केवल उनके कौशल का विकास करेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने का एक अनमोल अवसर भी प्रदान करेगी। प्रशिक्षण की तिथियां जल्द ही घोषित की जाएंगी, जिससे यह उम्मीद जल्द ही हकीकत में बदलेगी।
राकेश किरण झा ने बताया कि प्रशिक्षण के समापन पर, प्रतिभागियों के अथक प्रयासों और उनकी अनूठी क्षमताओं को समाज के सामने लाने के लिए एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। उनके द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण होगा।
इतना ही नहीं, दृष्टिबाधित प्रतिभा को मंच देने के लिए एक अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता का आयोजन करने पर भी सहमति बनी है। यह प्रतियोगिता अन्य राज्यों के प्रतिभागियों को भी अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे छिपी हुई प्रतिभाएं निखर कर सामने आएंगी।
यह नेत्रम फाउंडेशन की एक सच्ची और प्रेरणादायक पहल है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और दृष्टिबाधितों के जीवन में नई रोशनी भरने का संकल्प रखती है।
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