सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का अटूट संकल्प: कानूनी चुनौती और बुलंद हौसला
लद्दाख के प्रख्यात अन्वेषक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे अंगमो ने बुधवार को एक नई उम्मीद जगाई है। अपने पति के खिलाफ जारी किए गए नजरबंदी आदेशों के बावजूद, गीतांजलि का मनोबल अटूट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कानूनी टीम सक्रिय रूप से इस आदेश को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
वांगचुक और उनके कानूनी सलाहकार रितम खरे से मुलाकात के बाद, गीतांजलि ने साझा किया, “हमें नजरबंदी का आदेश मिला है, जिसे हम निश्चित रूप से चुनौती देंगे। सोनम का हौसला अडिग है, उनकी प्रतिबद्धता पहले से कहीं अधिक दृढ़ है, और उनका लचीलापन बरकरार है!” उन्होंने सभी के अटूट समर्थन और एकजुटता के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।
सुप्रीम कोर्ट की दखल और केंद्र से जवाबदेही की मांग
इससे पूर्व, सुप्रीम कोर्ट ने गीतांजलि द्वारा दायर एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से जवाब मांगा था। इस याचिका में, गीतांजलि ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अपने पति की हिरासत को चुनौती देते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने हिरासत के आधार बताने संबंधी उनकी याचिका पर कोई तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।
एनएसए के तहत हिरासत और लद्दाख का उग्र आंदोलन
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की दुखद मृत्यु हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए): एक अवलोकन
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) केंद्र और राज्यों को व्यक्तियों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, ताकि वे ऐसे कार्य न कर सकें जो “भारत की रक्षा के लिए हानिकारक” हों। इस कानून के तहत अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने है, हालांकि विशेष परिस्थितियों में इसे पहले भी रद्द किया जा सकता है।
जोधपुर जेल में वांगचुक और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
वर्तमान में, सोनम वांगचुक राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को जेल नियमों के तहत वांगचुक की चिकित्सा आवश्यकताओं को सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
पत्नी का दृढ़ निश्चय: “बदनामी की साजिश” के विरुद्ध
इससे पहले, सोनम वांगचुक की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए याचिका दायर की थी कि उनके पति के खिलाफ एक “झूठा अभियान” चलाया जा रहा है और यह “बदनामी की साजिश” का हिस्सा है। उनका यह दृढ़ निश्चय दिखाता है कि वह अपने पति के लिए न्याय की लड़ाई पूरी दृढ़ता से लड़ रही हैं।
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