जयपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठने के फैसले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. इसको लेकर उन्होंने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस संबंध में अशोक गहलोत ने कहा
इस संबंध में गहलोत ने आगे कहा कि अगर धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार के राज में परम संतों की यह हालत है तो यह घोर पाप है. सत्ता के अहंकार में प्रशासन द्वारा माफी मांगने के बजाय संत को नोटिस देना ‘विनाशकारी विपरीत बुद्धि’ का प्रमाण है।
शास्त्रों में कहा गया है: “न हि प्रभवस्नुः कश्चिदपि, अवामन्य तपस्विनः क्षेमं गनतुम।” अर्थ: किसी ऋषि का अपमान करके कोई भी शक्तिशाली व्यक्ति/शासक कल्याण प्राप्त नहीं कर सकता। संतों के इस अपमान के लिए भाजपा सरकार को तुरंत माफी मांगनी चाहिए।
पीसी:राजस्थान.एनडीटीवी
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