एस.आई.आर. का शोर, BLOs की जान पर बवाल: दावों और सच्चाई का खेल
पूरा देश एस.आई.आर. (Special Intensive Revision) के शोर में डूबा है। जहाँ एक ओर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं, वहीं दूसरी ओर एस.आई.आर. प्रक्रिया से जुड़े कई गंभीर सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। बिहार से शुरू हुई इस प्रक्रिया ने अब 12 राज्यों में अपनी पैठ बना ली है, जिसमें लगभग 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इस विशाल कार्य के केंद्र में हैं बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs), जिनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर विडंबना यह है कि इसी महत्वपूर्ण कार्य के चलते BLOs की जान पर बन आई है। आत्महत्या और ब्रेन हेमरेज की खबरें चिंताजनक रूप से सामने आ रही हैं, और यह आरोप भी लग रहे हैं कि अधिकारियों के दबाव में BLOs यह कदम उठा रहे हैं।
मृत्यु का बढ़ता सिलसिला और बढ़ता दबाव
सात राज्यों में अब तक 25 BLOs की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से ये दुखद खबरें आ रही हैं, जिनमें मध्य प्रदेश में सबसे अधिक मौतें हुई हैं। इस बीच, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारी लगातार इन आरोपों से पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका कहना है कि वे इन मामलों की जांच कर रहे हैं और BLOs की मौतें उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं का परिणाम हैं, न कि काम के दबाव का।
टारगेट का बोझ और सहयोग का अभाव
दूसरी ओर, यह भी दावा किया जा रहा है कि एस.आई.आर. कार्य में लगे BLOs पर लगातार टारगेट थोपे जा रहे हैं। यदि वे इन टारगेट को पूरा करने में असफल रहते हैं, तो उनके वेतन रोकने की बात कही जा रही है, जो उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है। कई जगहों पर तो यह भी सुनने में आ रहा है कि एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान स्थानीय लोगों से राजनीतिक कारणों से सहयोग नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते BLOs पर दबाव बढ़ रहा है और वे अपना काम पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कुछ स्थानों पर तो BLOs पर हमले की भी खबरें आई हैं, जिसके चलते कई राजनीतिक दल उनकी सुरक्षा की मांग उठा रहे हैं। हालांकि, यह भी कड़वा सच है कि BLOs के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के बजाय, राजनेता अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने में ज्यादा व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।
एक पूर्व अधिकारी की जुबानी: “हाँ, दबाव होता है”
बिहार में BLO के तौर पर काम कर चुके एक वरिष्ठ अधिकारी ने, नाम न छापने की शर्त पर, इस मसले पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि दबाव तो होता है, लेकिन ऐसा भी नहीं कि कोई आत्महत्या कर ले। उन्होंने बताया कि यह एक टेक्निकल काम है और तकनीक की मदद से इसे सरल बनाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति समय पर काम पूरा नहीं कर पाता है, तो उस पर दबाव लगातार बढ़ता जाता है, जिससे मानसिक परेशानी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह काम इतना भी मुश्किल नहीं है कि इसे पूरा न किया जा सके। लापरवाही या ढीले-ढाले रवैये से ही समय पर काम पूरा नहीं हो पाता, जिससे परेशानियां बढ़ती हैं और दबाव भी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह दबाव सिर्फ BLOs पर ही नहीं, बल्कि उनसे ऊपर के अधिकारियों, डीएम और उनसे भी ऊपर के लोगों पर होता है। समय पर कार्य पूरा करवाना और करवाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
आपसी सहयोग और बदलती परिस्थितियाँ
अधिकारी ने यह भी बताया कि जरूरत पड़ने पर कई BLOs एक-दूसरे की मदद के लिए भी आगे आते हैं। उन्होंने बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले एक बूथ पर एक BLO की जिम्मेदारी थी, जिसकी संख्या लगभग 1200 थी। अब, 1000 की आबादी पर एक बूथ बनाया जा रहा है और उसकी जिम्मेदारी एक BLO को दी जा रही है। एस.आई.आर. की शुरुआत बिहार से होने के कारण, उन्होंने यह भी साझा किया कि जब आधार कार्ड को मान्यता नहीं दी गई थी, तब परिस्थितियाँ काफी मुश्किल थीं और एस.आई.आर. के काम में कई बाधाएं आ रही थीं। लेकिन आधार कार्ड को मान्यता मिलने के बाद, यह काम काफी सरल हो गया। उन्होंने फिर से स्वीकार किया कि हाँ, ऊपर से दबाव रहता है, लेकिन इतना भी नहीं कि कोई गलत कदम उठाने पर मजबूर हो जाए।
सुरक्षा की मांग और आयोग का आश्वासन
वहीं, पश्चिम बंगाल में एस.आई.आर. प्रक्रिया में लगे BLOs और अन्य निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। यह कदम कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं को अज्ञात लोगों द्वारा धमकाए जाने की घटनाओं के बाद उठाया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से चुनाव आयोग से मुलाकात की और दावा किया कि पश्चिम बंगाल में एस.आई.आर. प्रक्रिया के कारण अब तक कम से कम 40 लोगों की मौत हुई है। हालांकि, आयोग ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


