भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन के सामने बने फ्लाईओवर के मेंटेनेंस विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार और पीडब्ल्यूडी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने 4.69 करोड़ रुपये के नए टेंडर पर रोक लगाते हुए ठेकेदार की ब्लैकलिस्टिंग पर भी स्टे दिया और जनता के पैसों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।
सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने भोपाल फ्लाईओवर के मेंटेनेंस मामले में राज्य सरकार और पीडब्ल्यूडी को आड़े हाथों लिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जिस काम को ठेकेदार अपने खर्च पर करने के लिए तैयार है, उसके लिए करोड़ों रुपये का नया टेंडर जारी करना सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्कूल और अस्पतालों का भी कोर्ट ने किया जिक्र
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के फंड आवंटन के तरीके पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे कामों के लिए सरकार के पास अचानक पैसा उपलब्ध हो जाता है, जबकि स्कूल भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कोर्ट परिसरों के निर्माण के समय फंड की कमी का हवाला दिया जाता है। अदालत ने साफ किया कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के नाम पर जनता के पैसे की बर्बादी स्वीकार नहीं की जा सकती।
बारिश के बाद फ्लाईओवर में मिलीं खामियां
मामला हबीबगंज रेलवे स्टेशन के सामने बने फ्लाईओवर से जुड़ा है, जिसका निर्माण वीवायएससी इन्फ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड ने किया था। इस मानसून में तेज बारिश के बाद फ्लाईओवर में कुछ तकनीकी खामियां और टूट-फूट सामने आईं। इसके बाद 30 जुलाई को राज्य सरकार और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कई कमियां मिलने के बाद ठेकेदार को उन्हें सुधारने के लिए तीन दिन का समय दिया।
तीन दिन का मौका देने के बाद नोटिस का आरोप
याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप है कि उसे सुधार के लिए पर्याप्त अवसर दिए बिना ही अगले दिन, 1 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। इसके साथ ही कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। कंपनी ने हाईकोर्ट में इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि अनुबंध की शर्तों के मुताबिक मेंटेनेंस अवधि में सामने आने वाली कमियों को दूर करना उसकी जिम्मेदारी है।
4.69 करोड़ के नए टेंडर पर भी सवाल
कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और अधिवक्ता रोहित शर्मा ने अदालत को बताया कि ठेकेदार अपने खर्च पर फ्लाईओवर की कमियां दूर करने के लिए तैयार था। इसके बावजूद विभाग ने इन्हीं सुधार कार्यों के लिए 4.69 करोड़ रुपये का नया मेंटेनेंस टेंडर जारी कर दिया। याचिकाकर्ता ने इसे जल्दबाजी और अनुचित कार्रवाई बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
ब्लैकलिस्टिंग और टेंडर दोनों पर रोक
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ठेकेदार कंपनी को बड़ी राहत दी। अदालत ने वीवायएससी इन्फ्रा प्रोजेक्ट को ब्लैकलिस्ट करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही 4.69 करोड़ रुपये के नए मेंटेनेंस टेंडर की प्रक्रिया पर भी स्टे दे दिया। हालांकि, कोर्ट ने ठेकेदार को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया है।
अब ठेकेदार को देनी होगी मेंटेनेंस रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने कंपनी को निरीक्षण के दौरान सामने आई सभी कमियों को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई तक सुधार कार्य की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करने को कहा गया है। अब सरकार को भी जवाब देना होगा कि जब मेंटेनेंस अवधि में ठेकेदार खुद सुधार कार्य करने के लिए तैयार था, तब 4.69 करोड़ रुपये का नया टेंडर क्यों जारी किया गया। अगली सुनवाई में ठेकेदार की रिपोर्ट और सरकार की सफाई अहम होगी।
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