दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा पर पुलिस का बड़ा कदम, PG और हॉस्टल व्यवस्था पर भी उठे सवाल

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा पर पुलिस का बड़ा कदम, PG और हॉस्टल व्यवस्था पर भी उठे सवाल

सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में आ गया है। PG और किराए के मकानों में रहने वाले छात्रों से पुलिस सीधे संवाद करेगी। वहीं, जर्जर छात्र आवास और हॉस्टल की कमी का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है।

सत्य निकेतन के बाद छात्र सुरक्षा पर फोकस

दिल्ली में पढ़ाई के लिए आने वाले हजारों छात्रों के लिए कॉलेज और करियर के साथ सुरक्षित आवास भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है। सत्य निकेतन में निजी PG की इमारत गिरने की घटना के बाद छात्रों के रहने की जगहों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

सत्य निकेतन से सटे मोची गांव में भी कई PG और गेस्ट हाउस संचालित होने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर पुरानी और जर्जर इमारतों के साथ संकरी गलियां आपात स्थिति में राहत और बचाव को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।

संकरी गलियों और पुरानी इमारतों ने बढ़ाई चिंता

इलाके में रहने वाले छात्र वंदन कोठारी ने आसपास की स्थिति की जानकारी दी। उनके मुताबिक, जिस PG में वह रहते हैं, उसके आसपास कई इमारतों की हालत ठीक नहीं है।

मोची गांव की गलियां इतनी संकरी हैं कि आपात स्थिति में राहत दलों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है। दोपहर के समय भी कुछ गलियों में पर्याप्त रोशनी नहीं दिखाई देने की बात सामने आई। हालांकि, इन परिस्थितियों को लेकर इमारतों की वास्तविक सुरक्षा स्थिति का आकलन संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब छात्रों से सीधे संवाद करेगी पुलिस

छात्रों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने विशेष आउटरीच पहल शुरू की है। सभी थानों के SHO और सब-डिविजन में तैनात ACP छात्रों से नियमित संवाद करेंगे।

पुलिस अधिकारी कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों के अलावा उन इलाकों में भी छात्रों से बातचीत करेंगे, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG, किराए के मकान या दूसरे आवासों में रहते हैं।

इस दौरान अपराध, उत्पीड़न, महिला सुरक्षा, आवास से जुड़े विवाद और स्थानीय समस्याओं की जानकारी ली जाएगी।

शिकायतों पर होगा फॉलो-अप

पुलिस की योजना केवल छात्रों से बातचीत करने तक सीमित नहीं है। जिन मामलों में स्थानीय पुलिस कार्रवाई कर सकती है, वहां सुधारात्मक और एहतियाती कदम उठाए जाएंगे।

वहीं, अगर किसी समस्या के समाधान के लिए MCD या किसी अन्य नागरिक एजेंसी की आवश्यकता होगी, तो संबंधित विभाग के साथ समन्वय किया जाएगा। अधिकारियों को इस पूरी कवायद की एक्शन टेकन रिपोर्ट 20 सितंबर तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस इस अभियान को आउटरीच और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग पहल के तौर पर भी आगे बढ़ाएगी।

DUSU चुनाव के बीच छात्र संगठनों की सक्रियता

इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव को लेकर भी कैंपस में गतिविधियां तेज हैं। 18 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के नामांकन की प्रक्रिया चल रही है।

NSUI ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला, जबकि ABVP ने PG में रहने वाले छात्रों से संपर्क अभियान चलाया। AAP की छात्र इकाई ASAP ने सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रार्थना सभा और भजन का आयोजन किया।

इससे साफ है कि छात्र सुरक्षा और आवास का मुद्दा अब कैंपस की राजनीति में भी प्रमुख विषय बन रहा है।

हॉस्टल की कमी का मामला हाई कोर्ट पहुंचा

दिल्ली में सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। याचिका में कॉलेजों में छात्रों की संख्या और उपलब्ध हॉस्टल सुविधाओं के बीच अंतर का मुद्दा उठाया गया है।

NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से दाखिल याचिका सत्य निकेतन की घटना के बाद दायर की गई। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

104 साल पुराने DU ढांचे पर सवाल

याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय के पुराने ढांचे और बढ़ती छात्र संख्या के बीच आवासीय सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद छात्रों की संख्या में काफी विस्तार हुआ, लेकिन उनके लिए रेजिडेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर उसी अनुपात में विकसित नहीं हुआ।

अब सत्य निकेतन की घटना के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और पर्याप्त आवास की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए। पुलिस की नई पहल तत्काल सुरक्षा संबंधी चिंताओं को संबोधित करने की कोशिश है, लेकिन लंबे समय के समाधान के लिए सुरक्षित PG, पर्याप्त हॉस्टल और मजबूत नागरिक ढांचे पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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