केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस सप्ताह मुंबई के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। रविवार, 13 सितंबर को वह दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित एशियाटिक सोसाइटी जाएंगे। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह पहली बार होगा जब कोई केंद्रीय गृह मंत्री इस प्रतिष्ठित संस्था का दौरा करेगा।
दुर्लभ किताबों से रूबरू होंगे शाह
दौरे के दौरान अमित शाह को एशियाटिक सोसाइटी की दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक संग्रह की विशेष प्रदर्शनी दिखाई जाएगी। संस्था लंबे समय से भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए जानी जाती है। ऐसे में शाह का यह दौरा इतिहास और वर्तमान राजनीति के बीच एक दिलचस्प जुड़ाव पेश करेगा।
चुनाव के बाद बदला नेतृत्व
एशियाटिक सोसाइटी के जुलाई में हुए चुनाव भी चर्चा में रहे थे। चुनाव में बीजेपी और दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के एशियाटिक टुमॉरो समूह ने जीत दर्ज की। इसके बाद बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय सहस्रबुद्धे को अध्यक्ष चुना गया। माना जा रहा है कि नए नेतृत्व के बाद संस्था की गतिविधियों को लेकर भी नई उम्मीदें जगी हैं।
शाह को भेजा गया था निमंत्रण
अध्यक्ष बनने के बाद डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने अमित शाह को पत्र भेजकर सोसाइटी आने का अनुरोध किया था। शाह ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया। संस्था के पदाधिकारियों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से लंबे समय से लंबित मांगों और संस्थागत मुद्दों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
फडणवीस और शिंदे भी रहेंगे साथ
मुंबई दौरे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी अमित शाह के साथ रहेंगे। एशियाटिक सोसाइटी के बाद सोमवार को शाह वाशी में आयोजित हिंदी राजभाषा सम्मेलन में शामिल होंगे। यानी दो दिनों का यह कार्यक्रम सांस्कृतिक विरासत से लेकर हिंदी भाषा के सरकारी इस्तेमाल तक कई महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ता है।
गोवा दौरे के बाद मुंबई पर नजर
इससे पहले अमित शाह तीन दिन के गोवा दौरे पर थे, जहां उन्होंने बीजेपी के नए राज्य कार्यालय ‘अटल भवन’ का उद्घाटन किया। उन्होंने ड्रग तस्करी के खिलाफ केंद्र और राज्यों की कार्रवाई पर भी बात की। अब मुंबई दौरे में एशियाटिक सोसाइटी की मौजूदगी यह संकेत देती है कि उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक यात्राओं में सांस्कृतिक संस्थानों पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
विरासत और राजनीति का संगम
अमित शाह का एशियाटिक सोसाइटी दौरा महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। दुर्लभ पुस्तकों और ऐतिहासिक धरोहर के बीच होने वाली यह मुलाकात संस्था के नए नेतृत्व और सरकार के बीच संवाद का अवसर भी बनेगी। अब देखना होगा कि यह दौरा केवल इतिहास को देखने तक सीमित रहता है या एशियाटिक सोसाइटी के भविष्य के लिए कोई नई दिशा भी तय करता है।
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