रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का भारत दौरा इस बार सिर्फ कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहने वाला। विमानन और रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों ने यात्रा को खास बना दिया है। PD-8 इंजन और Su-57 को लेकर संभावित बातचीत से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी पर नजरें टिक गई हैं।
पुतिन के साथ आएंगे बड़े प्रस्ताव
ब्रिक्स समिट के लिए व्लादिमिर पुतिन के भारत दौरे में कई अहम समझौतों पर चर्चा होने की संभावना है। खास तौर पर विमानन और रक्षा तकनीक से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे। रूस अपनी नई पीढ़ी के PD-8 इंजन को भारत में प्रदर्शित करने की तैयारी में है।
यह इंजन INNOPROM इंडिया में नजर आएगा, जिसका आयोजन 9 से 11 सितंबर तक भारत मंडपम में किया जा रहा है।
PD-8 इंजन क्यों है खास?
रूसी कंपनी Rostec के मुताबिक PD-8 को SJ-100 जैसे विमानों के लिए विकसित किया गया है। इंजन का ड्राई वेट करीब 1.7 टन है, जबकि नैसेल के साथ वजन लगभग 2.3 टन बताया गया है। यह करीब 8 टन का टेकऑफ थ्रस्ट पैदा करता है।
SJ-100 में 75 से 103 यात्रियों के बैठने की क्षमता है और इसकी उड़ान सीमा करीब 3,530 किलोमीटर है। इसकी अधिकतम क्रूज गति Mach 0.82 तक बताई गई है।
भारत में बन सकता है SJ-100
भारत और रूस के बीच विमानन सहयोग पहले ही आगे बढ़ चुका है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने रूस की United Aircraft Corporation के साथ भारत में SJ-100 के निर्माण को लेकर समझौता किया था।
रूसी पक्ष के अनुसार भारत में 100 से 200 विमानों की संभावित मांग पर बातचीत हुई है। अगर योजना आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय विमानन और घरेलू कनेक्टिविटी के लिए यह बड़ा बदलाव हो सकता है।
Su-57 पर भी बढ़ी उम्मीदें
पुतिन के दौरे से पहले Su-57 को लेकर भी रूस की ओर से संकेत दिए गए हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पांचवीं पीढ़ी के इस लड़ाकू विमान की बिक्री एजेंडे में शामिल है।
सबसे दिलचस्प पहलू तकनीक साझा करने की संभावित बातचीत है। भारत के लिए यह सिर्फ विमान खरीदने का मामला नहीं, बल्कि रक्षा तकनीक और स्वदेशी उत्पादन क्षमता से जुड़ा विषय भी हो सकता है।
विमानन से रक्षा तक साझेदारी
भारत लंबे समय से रूस के साथ रक्षा सहयोग करता रहा है। अब सहयोग का दायरा नागरिक विमानन और विनिर्माण तक बढ़ाने की कोशिश दिखाई दे रही है। SJ-100 का भारत में संभावित उत्पादन रोजगार और घरेलू एविएशन सप्लाई चेन के लिए भी अवसर पैदा कर सकता है।
दौरा क्यों है महत्वपूर्ण?
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब नई दिल्ली अपनी रक्षा जरूरतों के साथ-साथ आत्मनिर्भर विमानन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसलिए PD-8 इंजन से लेकर Su-57 तकनीक तक होने वाली बातचीत के नतीजे सिर्फ इस दौरे तक सीमित नहीं होंगे।
आने वाले वर्षों में यही फैसले तय कर सकते हैं कि भारत-रूस संबंध पारंपरिक रक्षा साझेदारी से आगे बढ़कर तकनीक, विनिर्माण और विमानन के नए दौर में कितनी मजबूती से प्रवेश करते हैं।
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