18वें BRICS सम्मेलन से पहले दिल्ली में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात करेंगे। इसके अगले दिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी दिल्ली पहुंचेंगे। ऐसे में भारत की कूटनीति का केंद्र BRICS बन गया है।
तड़के दिल्ली पहुंचे पुतिन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार, 11 सितंबर की सुबह करीब 3 बजे भारत पहुंचे। नई दिल्ली पहुंचने पर भारतीय अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पालम एयरपोर्ट पर पुतिन की अगवानी करने पहुंचे।
पुतिन के दौरे का सबसे अहम कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग पर बातचीत होने की संभावना है।
रक्षा एजेंडे पर खास नजर
मोदी और पुतिन की पिछली मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।
अब दिल्ली में होने वाली बैठक में रक्षा सहयोग पर विशेष नजर रहेगी। ब्रह्मोस मिसाइल के संभावित अपग्रेड, S-400 की बाकी डिलीवरी और Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े प्रस्ताव चर्चा में आ सकते हैं।
परमाणु और ऊर्जा सहयोग भी अहम
रक्षा के साथ सिविल न्यूक्लियर सेक्टर भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। भारत में नए सिविल न्यूक्लियर रिएक्टर लगाने की योजना और ऊर्जा सहयोग को लेकर दोनों पक्ष आगे की दिशा पर चर्चा कर सकते हैं।
भारत के लिए रूस के साथ ऊर्जा संबंध रणनीतिक महत्व रखते हैं। ऐसे में बातचीत का दायरा केवल रक्षा सौदों तक सीमित रहने के बजाय आर्थिक और तकनीकी साझेदारी तक फैल सकता है।
BRICS बिजनेस फोरम में पुतिन
पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन के अलावा बिजनेस फोरम से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। वह BRICS बिजनेस फोरम के प्लेनरी सत्र को संबोधित करेंगे।
भारत और रूस के बीच कारोबार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर भी बातचीत की उम्मीद है। BRICS के दौरान पुतिन की दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और मिस्र समेत कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें भी हो सकती हैं।
सात साल बाद भारत आएंगे जिनपिंग
BRICS सम्मेलन का दूसरा बड़ा कूटनीतिक आकर्षण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा होगी। वह 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे। करीब सात साल बाद हो रही इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी अलग द्विपक्षीय बैठक भी तय है।
इस बातचीत में व्यापार और सीमा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। दोनों देशों के संबंधों में हाल के वर्षों में उतार-चढ़ाव के बीच यह मुलाकात खास महत्व रखती है।
ईरान के साथ भी अहम बातचीत
BRICS के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बातचीत की भी संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बना सकते हैं।
ईरान के BRICS में शामिल होने के बाद संगठन की भूमिका पश्चिम एशिया के मुद्दों पर भी बढ़ी है। ऐसे में दिल्ली में हो रही बैठकों का असर केवल भारत-रूस या भारत-चीन संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। BRICS के मंच पर भारत की संतुलित कूटनीति की असली परीक्षा भी अब शुरू हो चुकी है।
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