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भारतीय नौसेना का ‘सुदर्शन’ पाल: इतिहास रचने और वैश्विक समुद्रों में तूफानी यात्रा पर
Oneindia Staff
Updated: Wednesday, January 21, 2026, 0:46 [IST]
भारतीय नौसेना ने अपने पाल प्रशिक्षण पोत, आईएनएस सुदर्शनी को एक विशाल और महत्वाकांक्षी मिशन पर रवाना किया है। मंगलवार को कोच्चि नौसेना बेस से प्रस्थान करते हुए, यह जहाज एक विशाल दस महीने के ट्रांस-ओशनिक अभियान पर निकल पड़ा है। इस दौरान आईएनएस सुदर्शनी 22,000 नॉटिकल मील की लंबी दूरी तय करेगा और 13 देशों के 18 बंदरगाहों पर अपनी पताका फहराएगा। इस गौरवशाली प्रस्थान को फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी नौसेना कमान, वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो ‘लोकयान 26’ के आगाज का प्रतीक है।
यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की समुद्री शक्ति और वैश्विक उपस्थिति का एक जीवंत प्रमाण है। नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार, इससे पहले दिसंबर में नौसेना दिवस के दौरान तिरुवनंतपुरम में इस जहाज ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। वाइस एडमिरल सक्सेना ने इस जहाज को विश्व मंच पर भारत का राजदूत करार दिया है, जो समुद्र के रास्ते अंतरराष्ट्रीय मित्रता के नए पुल बनाएगा।
विदाई समारोह बेहद भव्य और पारंपरिक था। तीन मस्तूल वाले विशाल बारके (Barque) ने नौसैनिक बैंड की ताल पर अपने पाल खोले और समुद्र की ओर प्रस्थान किया। अगले दस महीनों में, यह जहाज लगभग 22,000 समुद्री मील की दूरी तय कर दर्जनों बंदरगाहों तक पहुंचेगा।
वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व
इस यात्रा को और भी खास बनाते हैं इसके कुछ पड़ाव। मार्च से अप्रैल के बीच, आईएनएस सुदर्शनी फ्रांस के एस्केल ए सेते (Escale à Sète) में आयोजित होने वाले यूरोप के सबसे बड़े समुद्री उत्सवों में से एक में शिरकत करेगा। यहाँ भूमध्य सागर में प्रसिद्ध विशाल जहाजों के साथ खड़े होकर भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।
लेकिन यहीं तक सीमित नहीं है इसका सफर। जुलाई 2026 में, यह जहाज संयुक्त राज्य अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेगा। न्यूयॉर्क में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पाल परेड (Sail 250) के दौरान आईएनएस सुदर्शनी भारत की ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराएगा।
अत्याधुनिक हुनर और प्रशिक्षण
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित, आईएनएस सुदर्शनी एक 54-मीटर लंबा पाल प्रशिक्षण पोत है। इसमें 1,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करने वाले 20 पाल लगे हैं, जो इसे एक भव्य और शक्तिशाली रूप देते हैं। इस जहाज का उद्देश्य समुद्री प्रशिक्षुओं और अधिकारी कैडेटों को नौवहन कला और समुद्री ज्ञान में महारत हासिल करने के लिए एक अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म प्रदान करना है।
इस यात्रा का दर्शन भी बेहद गहरा है। यह प्राचीन व्यापार मार्गों और आधुनिक समुद्री राहों के मिलन का प्रतीक है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सूत्र को चरितार्थ करता है। यह यात्रा {MAHASAGAR} (Maritime Heads for Advancing Safety And Growth for All in the Region) के सिद्धांत को आगे बढ़ाती है, जिसमें क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति पर जोर दिया गया है। वाइस एडमिरल सक्सेना ने विदाई समारोह के दौरान ‘लोकयान 26’ पट्टिका का अनावरण करके इस मिशन को औपचारिक रूप दिया।
(स्रोत: पीटीआई इनपुट्स के साथ)
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