2017 के चर्चित उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के लिए 23 दिसंबर 2025 की तारीख एक बड़ी कानूनी जीत लेकर आई। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया और उन्हें सशर्त जमानत दे दी। इस ‘असंभव’ को ‘संभव’ बनाने के पीछे सेंगर की मजबूत कानूनी फौज की कड़ी मेहनत और सटीक दलीलें रहीं।
इस जीत की पटकथा दो दिग्गज वरिष्ठ अधिवक्ताओं और एक प्रखर एडवोकेट की त्रिमूर्ति ने लिखी। हालांकि, सेंगर अभी पूरी तरह आजाद नहीं होंगे, क्योंकि पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ के मामले में उनकी 10 साल की सजा बरकरार है।
आइए जानते हैं सेंगर की ‘कानूनी ढाल’ बने उन दिग्गज वकीलों के बारे में, जिनकी पैरवी ने यह राहत दिलाई:
1. सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन (N Hariharan): टीम के मुख्य रणनीतिकार
दिल्ली हाई कोर्ट के सबसे प्रतिष्ठित नामों में से एक, एन हरिहरन ने इस केस में लीड रोल निभाया। कोर्ट रिकॉर्ड्स बताते हैं कि सेंगर की ओर से सबसे धारदार दलीलें इन्होंने ही पेश कीं।
- दलील का आधार: हरिहरन ने तर्क दिया कि सेंगर पहले ही 7 साल से ज्यादा का समय जेल में बिता चुके हैं। चूंकि अपील अभी लंबित है और वह POCSO एक्ट की न्यूनतम सजा से अधिक समय जेल में काट चुके हैं, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
- प्रोफाइल: हरिहरन दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं और हाई-प्रोफाइल क्रिमिनल मामलों के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं।
2. सीनियर एडवोकेट मनीष वशिष्ठ (Manish Vashisht): कानूनी बारीकियों के उस्ताद
टीम के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ मनीष वशिष्ठ रहे। ‘बार एंड बेंच’ सहित तमाम लीगल रिपोर्ट्स में हरिहरन के साथ इनका नाम प्रमुखता से दर्ज है।
- भूमिका: वशिष्ठ ने अपील को मजबूत करने और सजा के निलंबन के तकनीकी पहलुओं पर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया।
- प्रोफाइल: क्रिमिनल और कमर्शियल मामलों के विशेषज्ञ वशिष्ठ जटिल अपीलों और बेल एप्लीकेशंस को सुलझाने के लिए जाने जाते हैं।
3. एडवोकेट एसपीएम त्रिपाठी (SPM Tripathi): कोर्ट से मीडिया तक बुलंद आवाज
सेंगर की टीम के एक और प्रमुख सदस्य एसपीएम त्रिपाठी ने न केवल कोर्ट रूम में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि फैसले के बाद मीडिया के सामने भी सेंगर का पक्ष मजबूती से रखा।
- भूमिका: त्रिपाठी ने कोर्ट में तर्क दिया कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया और जेल अवधि को देखते हुए सजा का निलंबन न्यायोचित है। ANI और अन्य मीडिया हाउस के लिए वे ही इस केस का चेहरा बने।
20 से ज्यादा वकीलों की ‘लीगल आर्मी’
सेंगर की इस कानूनी लड़ाई में सिर्फ तीन नाम नहीं, बल्कि वकीलों की एक लंबी फेहरिस्त शामिल थी। सालों से चली आ रही इस अपील में अमित सिन्हा, दीपक शर्मा, राहुल पूनिया, अंबुज सिंह, आशीष तिवारी, ऐश्वर्या सेंगर, गौरव कुमार, सौरभ द्विवेदी, पुन्या रेखा, अंगारा, वसुंधरा एन, अमन अख्तर, सना सिंह, वसुंधरा राज त्यागी, अर्जन सिंह मंडला, गौरी रामचंद्रन, वेदांश वशिष्ठ और स्वप्न सिंघल जैसे अधिवक्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया।
कैसे मिली जमानत?
इस केस में एक बड़ा मोड़ तब आया जब कोर्ट ने माना कि सेंगर को ‘पब्लिक सर्वेंट’ (लोक सेवक) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिससे उन पर लगे ‘अग्रीवेटेड चार्जेस’ (गंभीर आरोप) का प्रभाव कम हुआ और बेल का रास्ता साफ हो गया।
पीड़िता का संघर्ष जारी
एक तरफ जहां सेंगर की टीम राहत का जश्न मना रही है, वहीं पीड़िता ने इस फैसले को ‘अन्याय’ करार दिया है और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है।
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