मणिपुर में असम राइफल्स पर हमले में शामिल दो उग्रवादी गिरफ्तार

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मणिपुर में असम राइफल्स पर हमले में शामिल दो उग्रवादी गिरफ्तार
two militants involved in the ambush on an assam rifles convoy in manipur arrested

मणिपुर में असम राइफल्स पर हमले के तार जुड़े: प्रतिबंधित PLA के दो खूंखार उग्रवादी दबोचे

सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, बिष्णुपुर जिले में हुई कार्रवाई

इंफाल: मणिपुर में 19 सितंबर को असम राइफल्स के काफिले पर हुए जानलेवा हमले के मामले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के दो प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस कायराना हमले में शामिल बताए जा रहे हैं। इस वारदात में जहां दो जांबाज जवानों को अपनी शहादत देनी पड़ी थी, वहीं पांच अन्य घायल हो गए थे।

कड़ी पूछताछ के बाद खुलासा

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए उग्रवादियों की पहचान थोंग्राम सदानंद सिंह और चोंगथम महेश के रूप में हुई है। दोनों ही लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों में लिप्त बताए जा रहे हैं। पुलिस ने शनिवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी जारी करते हुए बताया कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी के ये दो सदस्य 19 सितंबर को बिष्णुपुर जिले के नाम्बोल सबल लेइकाई में 33 असम राइफल्स पर हुए हमले में सीधे तौर पर शामिल थे।

एक गुवाहाटी से, दूसरा कहां?

सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए एक उग्रवादी को असम के गुवाहाटी से गिरफ्तार किया है। हालांकि, दूसरे उग्रवादी की गिरफ्तारी के स्थान का अभी खुलासा नहीं किया गया है। यह स्पष्ट है कि पकड़े गए दोनों हीPLA के खूंखार सदस्य हैं, जिनकी गिरफ्तारी से मणिपुर की कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वरिष्ठ कैडर चोंगथम महेश की पहचान

गिरफ्तार किए गए चोंगथम महेश की पहचान प्रतिबंधित संगठन PLA के एक अत्यंत वरिष्ठ कैडर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, महेश 1990 से इस संगठन से जुड़ा हुआ है और उसे असम की क्राइम ब्रांच पुलिस की मदद से गुवाहाटी से पकड़ा गया है। वहीं, दूसरे गिरफ्तार आरोपी थोंग्राम सदानंद सिंह उर्फ ​​नगाचिक उर्फ ​​पुरकपा (18) की भी उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है।

मणिपुर की अशांति और राष्ट्रपति शासन

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर पिछले कई महीनों से मैतेई और कुकी-ज़ो समूहों के बीच चल रही जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। इस हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। राज्य में कानून व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। राज्य विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, को भी निलंबित कर दिया गया है। ऐसे में उग्रवादियों की गिरफ्तारी से राज्य में शांति बहाली की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।


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