बिहार में एनडीए में उठा-पटक: सीटों के बंटवारे पर घमासान, नेताओं की बगावत का डर
बिहार चुनाव की सरगर्मी तेज है, और सीट बंटवारे के बाद भी एनडीए गठबंधन में हलचल मची हुई है। ताजा विवाद केंद्रीय मंत्री और हम (एस) के संरक्षक जीतन राम मांझी के एक बड़े बयान से गरमाया है। मांझी ने साफ कहा कि उनका गुस्सा जायज है और वे इससे सहमत हैं। उनके अनुसार, जब फैसला हो चुका है, तो जेडी(यू) को आवंटित सीटों पर कोई और अपना उम्मीदवार क्यों उतार रहा है? इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए, मांझी ने बोधगया और मखदुमपुर में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है, भले ही नीतीश कुमार के फैसले से सहमत हों। उन्होंने कहा कि सूची तैयार है और एनडीए बहुमत से जीतेगा।
जेडी(यू) में भी टिकट को लेकर नाराजगी, इस्तीफे की धमकी
वहीं, भागलपुर से जदयू सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर अपने संसदीय पद से इस्तीफा देने की अनुमति मांगी है। उन्होंने टिकट वितरण प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संगठन पर स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी का आरोप लगाया। मंडल ने कहा कि 20-25 वर्षों से संगठन और जनता की सेवा के बावजूद, आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उनके निर्वाचन क्षेत्र में टिकट वितरण में उनकी राय को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कुछ लोग उनसे सलाह लिए बिना उनके लोकसभा क्षेत्र में टिकट बांट रहे हैं, जिससे समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।
इस बीच, जदयू के मौजूदा विधायक गोपाल मंडल ने पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास के बाहर धरना दिया। उन्होंने विधानसभा का टिकट न मिलने की साजिश का आरोप लगाया और कहा कि जब तक मुख्यमंत्री से मिलकर टिकट मिलने का आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वे यहीं बैठे रहेंगे। उन्हें उम्मीद है कि उनका टिकट नहीं काटा जाएगा।
सोनबरसा सीट पर जेडी(यू) का असंतोष: गठबंधन में दरार की आहट?
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ गया है। जनता दल यूनाइटेड ने अपने कई गढ़ों को अपने गठबंधन सहयोगियों के हाथों गंवाने पर असंतोष व्यक्त किया है। सोनबरसा सीट पर विवाद गहरा गया है, जहाँ वर्तमान जेडीयू नेता और राज्य मंत्री रत्नेश सदा के पास यह सीट कथित तौर पर चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दे दी गई है। जेडीयू ने पहले ही सोनबरसा से सदा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था, और इसे एलजेपी (आरवी) को देने का फैसला पार्टी को रास नहीं आ रहा है। यह स्थिति एनडीए में अंदरूनी कलह को उजागर करती है और आने वाले दिनों में और भी विवादों की ओर इशारा कर सकती है।
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