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International
oi-Bhavna Pandey
Updated: Monday, January 19, 2026, 21:22 [IST]
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार पाने का सपना अब खुले तौर पर गुस्से में बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय से शांति पुरस्कार की मांग कर रहे ट्रंप ने अब नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टॉर को एक खत लिखा है, जिसमें उनका दर्द और नाराजगी साफ झलक रही है। ट्रंप ने कहा है कि जब उन्हें यह पुरस्कार नहीं दिया गया, तो वे अब शांति के बारे में सोचने के लिए खुद को बाध्य महसूस नहीं करते। इस बयान के बाद आर्कटिक क्षेत्र में ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के दावे और भी आक्रामक हो गए हैं, जिससे नाटो देशों और विशेष रूप से नॉर्वे पर भारी दबाव बन गया है।
नोबेल न मिलने पर ट्रंप का गुस्सा फूटा
नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में ट्रंप ने अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए लिखा, “चूंकि आपके देश ने 8 युद्धों को रोकने के बावजूद मुझे नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला नहीं किया, अब मैं शांति के बारे में पूरी तरह से सोचने के लिए बाध्य महसूस नहीं करता। हालांकि शांति हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहेगी, लेकिन अब मेरा ध्यान सिर्फ इस बात पर होगा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा और सही है।” यह बयान उनकी लंबे समय से चली आ रही असंतुष्टि का सबसे बड़ा प्रमाण है।
पिछले 6 महीने से लगातार मांग
बीते छह महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को कई देशों के बीच युद्ध समाप्त करने का श्रेय देते हुए लगातार नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की है। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान समेत कई विवादित गुटों के बीच शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें मई 2025 में हुआ एक संभावित समझौता भी शामिल है। नॉर्वे को लिखे गए इस पत्र ने मौजूदा समय में इस मुद्दे को और भी संवेदनशील बना दिया है।
ट्रंप ने नॉर्वे PM को लिखी धमकी भरी चिट्ठी
इस पत्र में ट्रंप ने नॉर्वे से सीधे तौर पर डेनमार्क से बात करने और ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने की मांग की है। उन्होंने अपने शब्दों में साफ किया कि जब शांति पुरस्कार नहीं मिला तो अब वह सिर्फ अमेरिका के हितों के बारे में सोचेंगे। इस खत ने नॉर्वे की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि नॉर्वे, अमेरिका और ग्रीनलैंड दोनों का नाटो गठबंधन का हिस्सा हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकी और टैरिफ का दांव
ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग अब ट्रंप के लिए एक व्यापारिक धमकी में बदल गई है। उन्होंने इस मुद्दे पर आठ यूरोपीय संघ के सदस्य देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही है। यह मांग तब और तेज हो गई जब 3 जनवरी, 2026 को एक सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़ा। इस घटनाक्रम ने यूरोपीय सैन्य गठबंधन नाटो में हलचल पैदा कर दी है।
डेनमार्क की क्षमता पर सवाल
अपने पत्र में ट्रंप ने डेनमार्क की ग्रीनलैंड की सुरक्षा करने की क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड को रूस या चीन के हमले से नहीं बचा सकता। ट्रंप ने तर्क दिया, “सैकड़ों साल पहले एक नाव वहां उतरी थी, इसलिए उनके पास स्वामित्व का अधिकार है, लेकिन हमारी नावें भी वहां उतरी थीं।” उन्होंने नाटो में अमेरिका के योगदान का हवाला देते हुए कहा कि जब तक अमेरिका का ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है।
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