
पटना NEET छात्रा मौत मामला: क्या शंभू हॉस्टल के बंद कमरे के राज से उठेगा पर्दा? FSL की एंट्री और बड़े खुलासे की आहट
पटना के चर्चित शंभू हॉस्टल कांड में अब फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है। सुरागों की तलाश में टीम ने छात्रा के कमरे के चप्पे-चप्पे को बारीकी से खंगाला है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 72 से 96 घंटों के भीतर कोई बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को दिल्ली एम्स जांच के लिए भेजा गया है। गौरतलब है कि 6 जनवरी को इसी हॉस्टल के एक कमरे में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा रहस्यमय परिस्थितियों में बेहोश मिली थी।
6 से 9 जनवरी के बीच छात्रा को बचाने की जद्दोजहद में हॉस्टल कर्मी उसे एक के बाद एक तीन अलग-अलग अस्पतालों में ले गए, लेकिन अंततः उसकी जान नहीं बच सकी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पटना पुलिस की कार्यप्रणाली और भूमिका पर अब गंभीर उंगलियां उठ रही हैं।
शुरुआती तीन दिन की वो ‘सुस्ती’, जो साक्ष्यों पर भारी पड़ी
कानून के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में शुरुआती 24 से 48 घंटे निर्णायक होते हैं। यही वह समय होता है जब घटनास्थल को सील कर साक्ष्य सुरक्षित किए जाते हैं। लेकिन इस मामले में पुलिस तीन दिनों तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। न तो हॉस्टल को सील किया गया और न ही छात्रा के कमरे की घेराबंदी हुई। बिस्तर, कपड़े और अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य खुले पड़े रहे, जिससे उनके नष्ट होने का खतरा बढ़ गया।
थाना प्रभारी रौशनी कुमारी की ‘सुसाइड थ्योरी’ पर तीखे सवाल
जांच के शुरुआती दौर में थाना प्रभारी रौशनी कुमारी ने यह नैरेटिव पेश किया कि छात्रा ने आत्महत्या की है। हैरानी की बात यह है कि एएसपी, एसपी और एसएसपी स्तर के आला अधिकारी भी बिना किसी ठोस आधार के इसी थ्योरी को दोहराते रहे। मामला तब गरमाया जब पीड़ित परिजन न्याय की गुहार लेकर पटना के कारगिल चौक पर उतरे। भारी जनसमर्थन के बीच हुए इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर ही एफआईआर दर्ज कर दी, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पलट दी पूरी कहानी
घटना के चार दिन बाद जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, तो पुलिस के दावों की धज्जियाँ उड़ गईं। रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस की ‘आत्महत्या’ वाली कहानी पूरी तरह ध्वस्त हो गई। बढ़ते दबाव के बीच पुलिस को अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्वीकार करना पड़ा कि यौन शोषण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके तुरंत बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया, जिसने रविवार को प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल से इलाज के अहम दस्तावेज जुटाए।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल में FSL का ‘सर्च ऑपरेशन’
मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी को पूरा करने के लिए अब फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की एंट्री हुई है। सोमवार को FSL की पूरी टीम ने शंभू हॉस्टल पहुंचकर घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया। कमरे से हर उस छोटे सुराग को इकट्ठा किया गया है जो मौत की असली वजह तक ले जा सके। इन साक्ष्यों की अब वैज्ञानिक लैब में गहन जांच की जा रही है।
ADG CID पारसनाथ का बड़ा बयान: ‘हर नमूने की हो रही है जांच’
BIG BREAKING
NEET छात्रा रेप और मौत मामले में ADG CID पारसनाथ का बड़ा बयान. कहा – जांच में FSL भी सक्रिय. पूरी टीम ने हॉस्टल जाकर सबूत जुटाए, DNA समेत सभी नमूनों की जांच जारी. 2–3 दिनों में FSL रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को सौंप दी जाएगी. जांच के लिए रविवार को भी FSL कार्यालय खुला… pic.twitter.com/9CGsDA0wfO
— Aware Media (@prabhatkhabar) January 19, 2026
एडीजी सीआईडी पारसनाथ ने बताया कि डीएनए जांच जैसी जटिल प्रक्रियाओं के कारण जांच टीम रविवार को भी काम करती रही। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच तेज गति से जारी है और अगले दो-तीन दिनों में रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी जाएगी। अब सबकी निगाहें एफएसएल की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो शंभू हॉस्टल कांड के पीछे छिपे गुनहगारों का चेहरा बेनकाब करेगी।
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