वायु प्रदूषण पर गरमाई सियासत: राहुल गांधी और केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, संसद में बहस की मांग
सर्दियों के आगमन के साथ ही देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। इस गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल को लेकर जहां आम जनता परेशान है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले इस मुद्दे पर देशव्यापी बहस की मांग उठाई है।
राहुल गांधी का केंद्र पर तीखा प्रहार:
एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने में “कोई तत्परता, योजना या जवाबदेही नहीं” दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मैं जिस भी माँ से मिलता हूँ, वह मुझे एक ही बात कहती है: उसका बच्चा ज़हरीली हवा में साँस लेते हुए बड़ा हो रहा है। वे थके हुए, डरे हुए और गुस्से में हैं। मोदी जी, भारत के बच्चे हमारे सामने घुट रहे हैं। आप चुप कैसे रह सकते हैं? आपकी सरकार कोई तत्परता, कोई योजना, कोई जवाबदेही क्यों नहीं दिखाती?”
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि भारत को वायु प्रदूषण पर संसद में तत्काल, विस्तृत बहस की आवश्यकता है। उन्होंने इस स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए एक सख्त, लागू करने योग्य कार्य योजना की मांग की। “हमारे बच्चे स्वच्छ हवा के हकदार हैं – बहाने और ध्यान भटकाने वाले नहीं,” उन्होंने कहा। इस बीच, कांग्रेस 30 नवंबर को सोनिया गांधी के आवास पर संसदीय रणनीति समूह की बैठक करेगी, जिसमें शीतकालीन सत्र की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
केजरीवाल का जीएसटी पर विरोध:
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण और एयर प्यूरीफायर पर कथित तौर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। दिल्ली समेत उत्तर भारत में हवा जानलेवा हो गई है और समाधान देने के बजाय सरकार जनता से टैक्स वसूल रही है। लोग अपने परिवारों को प्रदूषण से बचाने के लिए एयर प्यूरीफायर खरीदने जाते हैं और उन्हें पता चलता है कि सरकार उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा रही है।”
आप प्रमुख ने इसे “सरासर अन्याय” बताया और केंद्र सरकार से एयर और वाटर प्यूरीफायर पर लगाए गए जीएसटी को तुरंत हटाने की मांग की। उन्होंने कहा, “अगर आप समाधान नहीं दे सकते, तो कम से कम जनता की जेब पर बोझ डालना तो बंद करें।”
दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में:
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 384 दर्ज किया गया। 27 नवंबर को शाम 4 बजे शहर का एक्यूआई 377 था। मामूली गिरावट के बावजूद, शहर की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है, जो नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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