पहलगाम के उस काले दिन ने जिस दर्द को जन्म दिया, उसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने जो जवाब दिया, उसकी गूंज अब एक झांकी के रूप में देश के सामने होगी। गणतंत्र दिवस परेड में दिखने वाली इस विशेष प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वह जीवंत कहानी बयां की जाएगी जिसने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे की कमर तोड़ दी थी। यह सिर्फ सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि तीनों सेनाओं के अटूट समन्वय और विजय के नारे का प्रतीक होगा।
वायुसेना प्रमुख मनीष सभरवाल ने एएनआई से बातचीत में इस झांकी की रूपरेखा साझा की, जिसके केंद्र में एक सीमा रेखा है—एक तरफ भारत, दूसरी ओर पाकिस्तान। इस झांकी में उस रात की कहानी है जब भारत ने आंख में आंख डालकर नौ आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया। इस ऑपरेशन में सेना के सात और वायुसेना के दो शिविरों को निशाना बनाया गया, और इसमें इस्तेमाल हुए हथियार इस झांकी में प्रमुखता से दिखाए जाएंगे।
यह प्रदर्शनी महज शस्त्रों का जमावड़ा नहीं, बल्कि युद्ध की वह गतिशील कहानी है जो भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाती है। इसमें हॉवित्जर तोप, कामिकेज़ ड्रोन और राफेल जैसे उन्नत प्लेटफॉर्म्स को शामिल किया गया है जो ऑपरेशन की रीढ़ थे। झांकी की कहानीकथा भारत के नए राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत—’त्वरित प्रतिक्रिया, नियंत्रित वृद्धि और अचूक सटीकता’ को चरितार्थ करती है।
पहला दृश्य HAROP लोइटरिंग मुनिशन का है, जो दुश्मन के वायु रक्षा रडार को चीरता हुआ उसे नष्ट कर देता है—यह मानवरहित युद्ध में भारत की बढ़ती पकड़ का प्रतीक है। उसके बाद राफेल की बारी आती है, जो SCALP मिसाइलों से आतंकी ढांचे पर सर्जिकल स्ट्राइक करता है। फिर आता है ब्रह्मोस का वो विनाशकारी प्रहार—SU-30 MKI से छोड़ी गई यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुश्मन के मजबूत विमान आश्रयों को ध्वस्त कर देती है।
इसके साथ ही दिखाई देती है भारत की एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली की ताकत—एस-400, जो 350 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के हवाई पूर्व चेतावनी मंच को निष्क्रिय कर देता है। यह सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि वो भारतीय संदेश है जो साफ कहता है: ‘भारत सबसे पहले पता लगाता है, सबसे पहले निर्णय लेता है और सबसे पहले नष्ट करता है।’
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