वेतनभोगियों पर आर्थिक बोझ, EPFO नियम पर विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
वेतनभोगियों पर आर्थिक बोझ, EPFO नियम पर विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला
विपक्ष ने EPFO नियम में बदलाव पर सरकार को घेरा, कहा- अर्थव्यवस्था नहीं संभलने की सजा वेतनभोगियों को दी जा रही है

साकेत गोखले का मोदी सरकार पर तीखा प्रहार: ईपीएफओ के नए नियम “पैसे की खुली चोरी”

तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने मोदी सरकार के नए ईपीएफओ नियमों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इन्हें “चौंकाने वाले और हास्यास्पद” करार दिया है। गोखले ने सीधा आरोप लगाया कि यह “वेतनभोगियों के पैसों की खुली चोरी” है, जो अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन का सीधा परिणाम है।

नौकरी जाने पर पैसा निकालने की अवधि में भारी वृद्धि:

सांसद गोखले ने नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव नौकरी जाने पर ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) बैलेंस निकालने की अवधि में की गई वृद्धि को बताया है। उन्होंने कहा, “पहले, नौकरी जाने पर आप दो महीने की बेरोजगारी के बाद अपना ईपीएफ बैलेंस निकाल सकते थे। अब उस न्यूनतम अवधि को आश्चर्यजनक रूप से बढ़ाकर एक साल कर दिया गया है।” इसका मतलब है कि अब अपना ही पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को दो महीने की बजाय पूरे एक साल तक बेरोजगार रहना पड़ेगा।

पेंशन हिस्से को निकालने की अवधि में भी लंबा इंतजार:

यही नहीं, गोखले ने पेंशन हिस्से को निकालने की शर्तों पर भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, “आप अपने ईपीएफ के पेंशन हिस्से को केवल 36 महीने की बेरोजगारी के बाद ही निकाल सकते हैं। पहले, आप इसे दो महीने बाद निकाल सकते थे।” यह बदलाव कर्मचारियों के लिए अपनी पेंशन राशि तक पहुंच को और भी कठिन बना देगा।

25% ईपीएफ बैलेंस “लॉक” करने का आरोप:

सबसे चिंताजनक बात बताते हुए, गोखले ने दावा किया कि “आपके ईपीएफ बैलेंस का 25 प्रतिशत निकाला ही नहीं जा सकता।” यह एक ऐसा प्रावधान है जो सैद्धांतिक रूप से कर्मचारियों को उनके ही पैसे के एक बड़े हिस्से को निकालने से रोकता है।

“अर्थव्यवस्था का कुप्रबंधन” और “वेतनभोगियों की सज़ा”:

इन सभी बदलावों को मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को ठीक से न संभालने का परिणाम बताते हुए, गोखले ने कहा, “मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को ठीक से न संभाल पाने की सज़ा वेतनभोगियों को मिल रही है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बनेगा।

तुरंत रद्द करने की मांग:

साकेत गोखले ने स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया से इन नए और कठोर नियमों को “तुरंत रद्द करने” का आग्रह किया है, ताकि वेतनभोगियों को उनके ही पैसों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना न करना पड़े।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *