टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) का 86वां दीक्षांत समारोह अब नए विवाद के बीच आयोजित होने जा रहा है। पहले जहां देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत को मुख्य अतिथि बनाया गया था, वहीं अब संस्थान ने अंतिम समय में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉक्टर सीएस प्रमेश को आमंत्रित किया है।
48 घंटे पहले स्थगित हुआ था समारोह
TISS का दीक्षांत समारोह पहले 2 अगस्त को प्रस्तावित था। कार्यक्रम से ठीक 48 घंटे पहले संस्थान ने ई-मेल जारी कर “अप्रत्याशित परिस्थितियों” का हवाला देते हुए इसे स्थगित कर दिया था। हालांकि उस समय कारण स्पष्ट नहीं किया गया था, लेकिन कैंपस में संभावित विरोध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता की खबरें सामने आई थीं।
संस्थान ने कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में समारोह को अनुकूल माहौल में आयोजित करना संभव नहीं था। इससे छात्रों, अभिभावकों और मेहमानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
विरोध प्रदर्शन की आशंका बनी वजह?
जस्टिस सूर्य कांत से जुड़ा एक बयान हाल के छात्र आंदोलनों के बीच विवाद का विषय बना था। इसी वजह से कुछ छात्र संगठनों और युवाओं में नाराजगी देखी गई थी। TISS प्रशासन को आशंका थी कि दीक्षांत समारोह के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं, जिससे कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
हालांकि संस्थान ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि मुख्य अतिथि बदलने का फैसला इसी वजह से लिया गया है या कोई अन्य प्रशासनिक कारण है।
छात्रों और परिवारों पर पड़ा असर
समारोह टलने के बाद कई ग्रेजुएट छात्रों और उनके परिवारों को परेशानी हुई। कई लोगों ने यात्रा और रहने की व्यवस्था पहले से कर ली थी। बाद में TISS ने प्रभावित छात्रों को परिस्थितियों के आधार पर आर्थिक सहायता देने की बात कही।
अब नया समारोह 22 अगस्त को मुंबई के देवनार स्थित नौरोजी कैंपस में आयोजित किया जाएगा।
NALSAR विवाद ने भी खींचा था ध्यान
इससे पहले हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में भी जस्टिस सूर्य कांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर छात्रों ने विरोध किया था। करीब 450 छात्रों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कार्रवाई भी चर्चा में आई, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा।
शिक्षा संस्थानों में बढ़ती संवेदनशीलता
TISS का यह मामला दिखाता है कि आज विश्वविद्यालयों में किसी भी बड़े आयोजन के लिए सिर्फ प्रशासनिक तैयारी ही नहीं, बल्कि छात्रों की भावनाओं और कैंपस माहौल को भी ध्यान में रखना पड़ता है। दीक्षांत समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है।
अब सभी की नजर 22 अगस्त के समारोह पर है कि यह आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है या विवाद की छाया आगे भी बनी रहती है।
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