वोट बैंक पर टीएमसी की निर्भरता? सुकांत मजूमदार का चुनाव आयोग की एसआईआर पर तंज
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर एक तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी द्वारा चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का कड़ा विरोध, उनके वोट बैंक की कमजोरियों को उजागर करता है। मजूमदार का कहना है कि टीएमसी फर्जी नामों, मृत मतदाताओं, स्थानांतरित मतदाताओं और घुसपैठियों पर अपनी चुनावी जीत के लिए निर्भर है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता का विरोध क्यों?
मजूमदार ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि SIR को पूरे देश में लागू किया जाएगा। ऐसे में, उन्होंने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस प्रक्रिया का “इतना जोरदार विरोध” क्यों कर रही हैं। उन्होंने कहा, “यह साफ दिखाता है कि फर्जी नाम, मृत मतदाता, स्थानांतरित मतदाता या घुसपैठिए, ये सब ममता बनर्जी का वोट बैंक हैं।”
“खून बहाने” की धमकी का पलटवार
मजूमदार ने टीएमसी नेतृत्व द्वारा दी जा रही “अपमानजनक और धमकी भरी” भाषा की निंदा की। उन्होंने कहा कि टीएमसी के सांसद और विधायक उन्हें “खून बहाने” की धमकी दे रहे हैं। विशेष रूप से, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की ओर से सेरामपुर आने और उन्हें घर वापस न लौटने देने की धमकी का जवाब देते हुए, मजूमदार ने कहा, “मैंने यह चुनौती स्वीकार कर ली है।” उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने लड़ाई लड़ी है, और वे उस भावना को जीवित रखना चाहते हैं।
भाजपा की चेतावनी और जनता का आक्रोश
इससे पहले, पश्चिम बंगाल पुलिस ने युवा कांग्रेस के सदस्यों को SIR प्रक्रिया के विरोध में मार्च करते हुए हिरासत में लिया था। ममता बनर्जी ने मतदाता सूचियों की देशव्यापी SIR कराने के चुनाव आयोग के फैसले का विरोध किया है और भाजपा को “आग से न खेलने” की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “बंगाल के लोग तुम पर कभी विश्वास नहीं करते।” उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के मतदाता सूची से नाम हटाने संबंधी बयान पर भी आपत्ति जताई और कहा, “आज उनकी सरकार है, लेकिन कल नहीं रहेगी।”
क्या है SIR?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध करना है। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाना, स्थानांतरित मतदाताओं को सही स्थानों पर सूचीबद्ध करना और अयोग्य मतदाताओं को हटाना शामिल है। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
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