जनजातीय गौरव का उद्घोष: भारत की चेतना में आदिवासियों का अमर योगदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आदिवासियों के शौर्य और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव हजारों वर्षों से भारत की आत्मा का अभिन्न अंग रहा है और देश कभी भी उनके बलिदानों को नहीं भुला सकता।
जनजातीय गौरव दिवस के पावन अवसर पर एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब भी देश के सम्मान, स्वाभिमान और स्वशासन का प्रश्न उठा है, तो हमारा आदिवासी समाज हमेशा सबसे आगे खड़ा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके अद्वितीय योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।
प्रधानमंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकारों पर आदिवासी समुदाय की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छह दशकों के उनके शासनकाल में, आदिवासी समुदायों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुपोषण, शिक्षा की कमी और अन्य अभावों ने कई आदिवासी क्षेत्रों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें उदासीन रहीं, जबकि भाजपा के लिए आदिवासी कल्याण हमेशा से एक सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि उनकी सरकार आदिवासी भाइयों और बहनों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने समुदाय को सशक्त बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मां नर्मदा की पावन धरती आज एक और ऐतिहासिक आयोजन की गवाह बन रही है। उन्होंने 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की 150वीं जयंती और ‘भारत पर्व’ के शुभारंभ का उल्लेख किया। आज, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के इस भव्य आयोजन के साथ, हम ‘भारत पर्व’ की पूर्णता के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने इस पावन अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा को सादर नमन किया। उन्होंने हाल के वर्षों में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन महाकाल कॉरिडोर, अयोध्या के राम मंदिर और केदारनाथ धाम जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के अभूतपूर्व विकास की भी चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि 2021 में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना शुरू किया गया था। उन्होंने कहा, “जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है। जब-जब देश के सम्मान, स्वाभिमान और स्वराज की बात आई, तो हमारा आदिवासी समाज सबसे आगे खड़ा हुआ। हमारा स्वतंत्रता संग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। स्वतंत्रता आंदोलन में ट्राइबल समाज के योगदान को हम भुला नहीं सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि 2014 से पहले, भगवान बिरसा मुंडा को केवल उनके आसपास के गांवों तक ही याद किया जाता था, लेकिन आज देशभर में कई ट्राइबल संग्रहालय बनाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज ‘जनजातीय गौरव दिवस’ का यह अवसर हमें उस अन्याय को भी याद करने का मौका देता है, जो हमारे करोड़ों आदिवासी भाई-बहनों के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में छह दशक तक राज करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया था। प्रधानमंत्री ने पुनः जोर देकर कहा कि आदिवासी कल्याण भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और उनकी सरकार हमेशा इस संकल्प के साथ आगे बढ़ी है कि वह आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करेगी और विकास का लाभ उन तक पहुंचाएगी।
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