साइबर ठगी के दो शातिर मुंबई एयरपोर्ट पर दबोचे गए

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साइबर ठगी के दो शातिर मुंबई एयरपोर्ट पर दबोचे गए
Cyber Fraud मामले के दो आरोपी Mumbai Airport पर गिरफ्तार

800 करोड़ की ऑनलाइन सट्टेबाजी का भंडाफोड़: सूरत पुलिस ने मुंबई से दो गिरफ्तार, 149 बैंक खाते शक के घेरे में

सूरत पुलिस के साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने 800 करोड़ रुपये के एक बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी धोखाधड़ी मामले में दो मुख्य आरोपियों को मुंबई हवाई अड्डे से धर दबोचा है। इस सनसनीखेज खुलासे ने ऑनलाइन जुआ और ठगी के खेल की गहराई को उजागर किया है।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका:

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी अहमदाबाद के नरोदा क्षेत्र निवासी जतिन ठक्कर, जो ‘जॉन रैपर’ के नाम से भी जाना जाता है (27 वर्ष), और सूरत के निवासी दीपकुमार ठक्कर (24 वर्ष) हैं। उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

जांच का दायरा और पूर्व गिरफ्तारियां:

यह गिरफ्तारी साइबर अपराध प्रकोष्ठ द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है। इससे पहले, प्रकोष्ठ ने सूरत के कतारगाम इलाके में छापेमारी कर मीत शाह, यश शिंदे, ऋषिकेश सपकाल, नीलेश सोलंकी और परेशकुमार मोदी को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था। इन सभी पर ऑनलाइन सट्टेबाजी पोर्टल या मंचों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने का आरोप है।

149 बैंक खातों का जाल और 417 शिकायतें:

पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर 149 बैंक खातों का उपयोग कर रहे थे, जिनके संबंध में पूरे भारत में 417 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। यह दर्शाता है कि धोखाधड़ी का जाल कितना व्यापक था और कितने लोग इसके शिकार हुए।

फरार होने पर जारी हुआ था एलओसी:

जतिन और दीपकुमार के मामले में, उनके फरार होने की आशंका को देखते हुए सूरत पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया था, जिसने उन्हें मुंबई हवाई अड्डे पर पकड़ने में मदद की।

‘म्यूल अकाउंट’ का इस्तेमाल और धन का प्रबंधन:

अधिकारी ने यह भी बताया कि जतिन ठक्कर ने कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन खातों का उपयोग 50 से अधिक ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ मंचों से प्राप्त विशाल धन को व्यवस्थित करने के लिए किया गया था। ‘म्यूल अकाउंट’ वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें अवैध लेनदेन को छिपाने के उद्देश्य से खोला या उपयोग किया जाता है। यह खुलासा इस बात पर प्रकाश डालता है कि किस तरह से ऑनलाइन धोखाधड़ी में धन के प्रवाह को छिपाने के लिए जटिल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है।


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