ट्रम्प प्रशासन का H1B वीज़ा शुल्क वृद्धि का झटका: नैस्कॉम ने कर्मचारियों को वापस बुलाने का आग्रह किया
नई दिल्ली: एच1बी वीज़ा की फीस में वृद्धि को लेकर भारत की प्रमुख उद्योग निकाय नैस्कॉम ने एक बड़ा कदम उठाया है। नैस्कॉम ने अपनी सदस्य कंपनियों से अमेरिका से बाहर रह रहे एच1बी वीज़ा धारक कर्मचारियों को तुरंत अमेरिका वापस बुलाने का आग्रह किया है। नैस्कॉम के उपाध्यक्ष शिवेंद्र सिंह ने इस फैसले को बिना पर्याप्त परामर्श के लिया गया बताया है और कहा है कि इतनी बड़ी नीतिगत घोषणा को लागू करने से पहले उद्योग जगत को संवाद और तैयारी का समय दिया जाना चाहिए था।
अचानक बदलाव से बढ़ी अनिश्चितता
नैस्कॉम ने विशेष रूप से 21 सितंबर की समय-सीमा पर आपत्ति जताई है, क्योंकि केवल एक दिन की नोटिस अवधि दुनिया भर के पेशेवरों, छात्रों और कंपनियों के लिए गंभीर अनिश्चितता पैदा करती है। यह स्थिति न केवल प्रोजेक्ट डिलीवरी को बाधित कर सकती है, बल्कि ग्राहकों के साथ चल रही कई परियोजनाओं की निरंतरता पर भी खतरा पैदा कर सकती है।
अमेरिकी नवाचार पर पड़ सकता है असर
नैस्कॉम का मानना है कि एच1बी वीज़ा, अमेरिकी और भारतीय कंपनियों के संचालन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस पर अत्यधिक शुल्क लगाने से अमेरिका का नवाचार इको-सिस्टम प्रभावित होगा। विशेष रूप से ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें वैश्विक प्रतिस्पर्धा का भविष्य तय कर रही हैं, उच्च कौशल वाले भारतीय पेशेवरों पर प्रतिबंध अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर कर सकता है।
भारतीय आईटी कंपनियों की चुनौतियां
इस फैसले से भारत की प्रमुख प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियां भी प्रभावित होंगी। विदेशों में चल रहे कई प्रोजेक्ट्स की व्यावसायिक निरंतरता बाधित होगी और कंपनियों को ग्राहकों के साथ मिलकर नए समायोजन करने पड़ेंगे। हालांकि, नैस्कॉम ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-केंद्रित कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियों पर जोर देकर एच1बी पर निर्भरता कम की है, लेकिन अचानक लिया गया यह कदम बड़ी बाधा खड़ी करेगा।
कौशल वाले भारतीय कर्मचारियों का योगदान
नैस्कॉम ने इस बात पर जोर दिया कि एच1बी वीज़ा धारक भारतीय कर्मचारी अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का खतरा नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये कंपनियां सभी नियमों का पालन करती हैं, प्रचलित वेतन देती हैं और शिक्षा जगत व स्टार्टअप्स के साथ नवाचार साझेदारी करती हैं। इस कारण उच्च-कौशल वाली भारतीय प्रतिभा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नवाचार, वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता की दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
दोतरफा नुकसान की संभावना
एच1बी वीज़ा शुल्क बढ़ाने का ट्रम्प प्रशासन का फैसला केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिकी कंपनियों और नवाचार सिस्टम के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। एक दिन की समय-सीमा और उद्योग जगत से परामर्श के बिना लागू किया गया यह बदलाव पेशेवरों और कंपनियों को मुश्किल स्थिति में डाल रहा है। नैस्कॉम का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में तकनीकी नेतृत्व बनाए रखना चाहता है, तो उसे भारतीय आईटी पेशेवरों की भूमिका और योगदान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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