पाई-पाई को मोहताज थे रणधीर कपूर! पहली कार के लिए जब पत्नी बबीता से उधार और प्रोड्यूसर्स से एडवांस लेने की आई थी नौबत

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पाई-पाई को मोहताज थे रणधीर कपूर! पहली कार के लिए जब पत्नी बबीता से उधार और प्रोड्यूसर्स से एडवांस लेने की आई थी नौबत
बबीता से उधार, तो प्रोड्यूसर्स से एडवांस, जब गाड़ी खरीदने के लिए रणधीर कपूर ने जोड़े थे पाई-पाई

70 के दशक के चॉकलेटी हीरो रणधीर कपूर: जब एक भिखारी के तंज ने बदल दी थी उनकी शान-ओ-शौकत, पढ़ें उनकी जिंदगी का वो अनसुना किस्सा।

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सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित ‘कपूर खानदान’ की विरासत को आगे बढ़ाने वाले रणधीर कपूर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पृथ्वीराज कपूर के पोते और शो-मैन राज कपूर के सबसे बड़े बेटे होने के बावजूद, उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलहदा और जुदा पहचान बनाई।

15 फरवरी 1947 को मुंबई में जन्मे रणधीर कपूर का फिल्मी सफर महज 8 साल की उम्र में ‘श्री 420’ (1955) से बतौर बाल कलाकार शुरू हो गया था। हालांकि, उनकी असली पारी 1971 में फिल्म ‘कल आज और कल’ से शुरू हुई, जहां उन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की कमान भी संभाली। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में इसलिए खास है क्योंकि इसमें पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर और रणधीर कपूर के रूप में कपूर खानदान की तीन पीढ़ियां एक साथ नजर आई थीं। साथ में उनकी पत्नी बबीता भी इस फिल्म का हिस्सा थीं।

1970 के दशक में रणधीर कपूर ने ‘जीत’, ‘जवानी दीवानी’, ‘हमराही’, ‘हाथ की सफाई’ और ‘रामपुर का लक्ष्मण’ जैसी एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और रोमांटिक अंदाज को दर्शकों ने खूब सराहा।

भले ही वह एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन अपनी पहली लग्जरी कार खरीदने के लिए उन्हें काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी। इस दिलचस्प और प्रेरणादायक किस्से का खुलासा उन्होंने खुद ‘द कपिल शर्मा शो’ में किया था।

रणधीर कपूर ने बताया था, “एक्टर बनने के बाद भी मैं घर की एक मामूली छोटी गाड़ी का इस्तेमाल करता था। एक बार जब मैं सड़क पर था, तो एक भिखारी मेरे पास आया और ताना मारते हुए बोला—पिक्चर में तो तुम बड़ी लंबी गाड़ियों में घूमते हो, असल जिंदगी में इस छोटी सी कार में?” भिखारी की यह बात रणधीर के दिल को लग गई। उन्होंने तुरंत घर जाकर पत्नी बबीता से उनकी जमापूंजी मांगी और कुछ फिल्म प्रोड्यूसर्स से एडवांस पैसे लिए। आखिरकार उन्होंने अपनी पहली बड़ी शानदार गाड़ी खरीदी। जब वह इस कार को लेकर अपने पिता राज कपूर के पास पहुंचे, तो राज साहब ने खुश होकर आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम और तरक्की करो।

जब रणधीर ने अपने पिता को भी वैसी ही शानदार गाड़ी लेने की सलाह दी, तो राज कपूर ने एक ऐसा जवाब दिया जो आज भी फिल्म जगत में मिसाल माना जाता है। उन्होंने कहा, “बेटे, मुझे बड़ी गाड़ी की जरूरत नहीं है। मैं अगर बस में भी सफर करूंगा, तो लोग यही कहेंगे कि देखो राज कपूर बैठा है। तुम्हें अपनी पहचान बनाने के लिए इसकी जरूरत है, मुझे नहीं।”



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