75वें संविधान दिवस पर दिग्गी की चिंता: संविधान की नींव हिल रही है?

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
75वें संविधान दिवस पर दिग्गी की चिंता: संविधान की नींव हिल रही है?
संविधान को खतरा, चुनाव आयोग पर सवाल, 75वें संविधान दिवस पर दिग्विजय सिंह ने क्या जताई चिंता

संविधान दिवस पर दिग्गजों की राय: एक ओर चिंता, तो दूसरी ओर गौरव

75वें संविधान दिवस के पावन अवसर पर, देश की राजनीतिक सरगर्मी में हलचल मचाने वाले बयान सामने आए हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जहाँ संवैधानिक व्यवस्था की अखंडता पर गहरी चिंता जताई, वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के निर्माताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए देश को बधाई दी।

दिग्विजय सिंह की चिंता: क्या सुरक्षित है संवैधानिक व्यवस्था?

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को 75वें संविधान दिवस के मौके पर देश की संवैधानिक व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, “आज सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या हमारी संवैधानिक व्यवस्था अक्षुण्ण रहेगी। क्या संवैधानिक संस्थाएँ निष्पक्ष तरीके से काम करेंगी?” सिंह ने विशेष रूप से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा, “हम सभी देख सकते हैं कि चुनाव आयोग किस तरह पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है। एसआईआर में हेराफेरी हुई है।” उन्होंने चुनाव आयोग से मतदाता सूची साझा करने की मांग की, ताकि नामों के दोहराव जैसी विसंगतियों की जाँच की जा सके।

राष्ट्रपति मुर्मू का संविधान के प्रति नमन: गौरव और आभार का क्षण

दूसरी ओर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान दिवस के अवसर पर मूल संविधान निर्माताओं के दृष्टिकोण और सपनों को बनाए रखने के लिए संसद सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “इसके अतिरिक्त, मैं सदस्यों के सौभाग्य और समृद्धि के लिए इस स्मरणोत्सव पर आदरपूर्वक नमन करती हूँ।”

संविधान के प्रारूपण के इतिहास को याद करते हुए, राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अथक प्रयासों की प्रशंसा की, जिन्होंने भारत के इस सर्वोच्च कानूनी दस्तावेज़ को आकार दिया। उन्होंने बताया कि 26 नवंबर, 1949 को इसी केंद्रीय कक्ष में, संविधान सभा के सदस्यों ने संविधान का प्रारूपण कार्य पूरा किया था, और इसी दिन भारत के लोगों ने इसे अंगीकार किया था। राष्ट्रपति ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जो संविधान सभा के अध्यक्ष थे और बाद में भारत के पहले राष्ट्रपति बने, के योगदान को भी रेखांकित किया।

एक तरफ संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल, दूसरी तरफ संविधान के निर्माण पर गर्व का इजहार – संविधान दिवस पर देश के दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं, जो देश की वर्तमान राजनीतिक चर्चा को और भी अहम बना रहे हैं।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *