बिहार को ‘एक और मौका’: नीतीश कुमार का एनडीए के पक्ष में जनता से भावनात्मक आह्वान
बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के दिग्गज नेता, नीतीश कुमार ने आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की जनता से एक मार्मिक अपील की है। उन्होंने लोगों से उन्हें ‘एक और मौका’ देने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया है। उनकी पार्टी, जदयू, द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में, मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केवल एनडीए ही बिहार को प्रगति के पथ पर ले जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में विकास की गति अभूतपूर्व रही है और आगामी वर्षों में यह और भी तेज होगी। बिहार में मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जिसके नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
‘अपमान’ से ‘सम्मान’ तक का सफर: राजद के शासन पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में पूर्ववर्ती राजद सरकार पर तीखा निशाना साधा, 2005 में बिहार की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ‘बिहारी’ कहलाना भी एक अपमान था। उन्होंने पूरी निष्ठा और अथक परिश्रम से राज्य के विकास के लिए दिन-रात काम करने का दावा किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार के क्षेत्र में युवा शक्ति के लिए किए गए कार्यों को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने दलितों और पिछड़ों सहित समाज के हर वर्ग के उत्थान का वादा दोहराया। आज, ‘बिहारी होना अपमान नहीं, बल्कि गौरव की बात है’, यह कहते हुए उन्होंने अपने कार्यकाल की सफलता को उजागर किया।
महिला सशक्तिकरण और बिजली क्रांति: जदयू सरकार की उपलब्धियों का बखान
नीतीश कुमार ने पिछली सरकारों द्वारा महिलाओं के लिए उपेक्षित प्रयासों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सशक्त बनाया है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया।
उन्होंने 2005 में बिहार की बिजली की दयनीय स्थिति का भी चित्रण किया, जहां प्रति व्यक्ति बिजली की खपत मात्र 75 यूनिट थी और उपभोक्ताओं की संख्या नगण्य थी। लालटेन युग में जीने को मजबूर प्रदेशवासियों के लिए यह एक अत्यंत अंधकारमय दौर था, जिसमें बिजली चोरी भी आम थी।
बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार: ‘हम बिजली की स्थिति सुधारेंगे’ का संकल्प
24 नवंबर 2005 को सत्ता संभालने के बाद, नीतीश सरकार ने बिजली व्यवस्था में सुधार का संकल्प लिया। विद्युत आपूर्ति, उत्पादन और ट्रांसमिशन प्रणालियों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा गया। ग्रामीण विद्युतीकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। 15 अगस्त 2012 को पटना के गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, मुख्यमंत्री ने एक साहसिक घोषणा की थी: ‘हम बिजली की स्थिति सुधारेंगे। यदि हम बिजली की स्थिति में सुधार नहीं ला पाए, तो 2015 के चुनावों में मैं वोट मांगने नहीं आऊंगा।’ इस वादे को पूरा करने के लिए, 31 अक्टूबर 2012 को बिहार राज्य विद्युत बोर्ड को समाप्त कर पांच नई विद्युत कंपनियां बनाई गईं, जिससे बिजली क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार हुए।
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