रुपया डॉलर के मुकाबले गिरा, कांग्रेस ने 2013 के पीएम मोदी के बयान को हथियार बनाया

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रुपया डॉलर के मुकाबले गिरा, कांग्रेस ने 2013 के पीएम मोदी के बयान को हथियार बनाया
congress attacks pm modi over rupees fall against the dollar 2013 statement resurfaces

रुपये की लुढ़कन पर सियासत गरमाई, कांग्रेस ने पीएम मोदी के 2013 के बयान की दिलाई याद

भारतीय रुपया, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले लगातार अपनी पकड़ खोता दिख रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में बहस को फिर से हवा दे दी है। कांग्रेस ने सोमवार को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया, और रुपये की कमजोरी को “चिंताजनक” बताते हुए, 2013 में पीएम मोदी द्वारा दिए गए एक बयान की याद दिलाई।

यह गिरावट पिछले शुक्रवार को ही स्पष्ट हो गई थी, जब रुपया 98 पैसे की भारी गिरावट के साथ 89.66 पर बंद हुआ, जो अब तक का इसका सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, घरेलू और वैश्विक शेयर बाजारों में हुई बड़ी बिकवाली, डॉलर की मांग में इजाफा और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं इस अप्रत्याशित गिरावट के पीछे के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। हालांकि, सोमवार की सुबह बाजार खुलते ही रुपये ने थोड़ी राहत दी और 89.46 के स्तर पर खुलने के बाद 89.17 तक मजबूत हुआ।

कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रुपये में जारी गिरावट जल्द ही 90 के आंकड़े को पार कर सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि क्या उन्हें जुलाई 2013 में रुपये की गिरती कीमतों पर दिया गया उनका बयान याद है। उन्होंने इस बात को पुख्ता करने के लिए एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें नरेंद्र मोदी, जो उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तत्कालीन यूपीए सरकार पर व्यंग्य कसते हुए कह रहे हैं, “रुपया इतनी तेज़ी से गिर रहा है कि लगता है दिल्ली की सरकार और रुपये में कोई प्रतियोगिता चल रही है कि किसकी इज़्ज़त पहले गिरती है।”

यह ध्यान देने योग्य है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर का मजबूत होना कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापारिक तनाव और निवेशकों की बदलती रणनीतियां भी भारतीय रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में विदेशी निवेश का रुख और वैश्विक बाजार के संकेत ही रुपये के भविष्य के उतार-चढ़ाव को निर्धारित करेंगे, जबकि सरकार स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।


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