छोटी दिवाली 2025: नरक चतुर्दशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व
दीपावली का उल्लास केवल एक दिन के त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सिलसिला छोटी दिवाली (विवरिका/नरक चतुर्दशी) से शुरू हो जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वर्ष 2025 में, छोटी दिवाली 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जिसका लक्ष्मी पूजा और यम देवता की पूजा के साथ गहरा संबंध है। कुछ क्षेत्रों में इस दिन दीये जलाए जाते हैं, जबकि अन्य परंपराओं में पुराने दीयों का प्रयोग होता है।
छोटी दिवाली पर घरों में दीये प्रज्वलित करने, पूजा करने और भोग लगाने की प्रथा है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में की गई पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। सच्चे हृदय से की गई पूजा घर से दरिद्रता और रोगों का नाश करती है।
नरक चतुर्दशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 06:42 से 07:18 तक है। इस दौरान घर के मुख्य मंदिर में देवी लक्ष्मी की पूजा और धन वृद्धि की कामना करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और समृद्धि आती है।
अन्य शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:43 से सुबह 05:34
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:29
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:00 से दोपहर 02:45
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:47 से शाम 06:13
छोटी दिवाली का मुख्य उद्देश्य यम देवता की पूजा करना है, ताकि परिवार में सुख-शांति और दीर्घायु बनी रहे। इस दिन काले और लाल रंग के दीये जलाए जाते हैं और मिठाई, फल व फूल का भोग लगाया जाता है। घर के हर कोने में दीये जलाने से अंधकार दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वातावरण निर्मित होता है।
छोटी दिवाली पर पूजा के दौरान करें ये कार्य
विवरिका या छोटी दिवाली पर, विशेषकर उत्तर भारत में, पान और धूप का भोग लगाने का भी प्रचलन है। पान को शुभता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन इसका विशेष महत्व है। मान्यता है कि परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर की गई पूजा का फल अधिक मिलता है।
ज्योतिषियों का कहना है कि इस दिन पूजा और भोग लगाने से जीवन से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है, और घर में धन, सुख व स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। इसलिए, छोटी दिवाली के शुभ मुहूर्त का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस वर्ष छोटी दिवाली का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह रविवार को पड़ रही है। रविवार को सूर्य देव का दिन माना जाता है, और इस दिन प्रकाश के इस पर्व को मनाने से उत्साह और सकारात्मकता का संचार होता है।
विशेष नोट: प्रस्तुत जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। किसी भी उपाय को करने से पूर्व विशेषज्ञों से सलाह अवश्य लें।
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