महादुर्गाष्टमी: मां महागौरी की आराधना का विशेष पर्व
नवरात्र का आठवां दिन, महादुर्गाष्टमी, मां महागौरी की पूजा के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इस शुभ अवसर पर देवी महागौरी की आराधना से भक्तों को मनोवांछित फल, उत्तम स्वास्थ्य और पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सच्ची भक्ति और निष्ठा से की गई साधना से भगवती जीवन के समस्त सुख-सुविधाओं से नवाजती हैं। आइए, हम महाअष्टमी व्रत के महत्व और इसकी पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानें।
शारदीय महादुर्गाष्टमी: देवी महागौरी का पावन दिवस
शारदीय महादुर्गाष्टमी के दिन आदिशक्ति के आठवें स्वरूप, मां महागौरी की पूजा की जाती है। वे पवित्रता, शांति और सादगी की प्रतीक हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने विकराल असुरों चंड, मुंड और रक्तबीज का संहार कर धर्म की स्थापना की थी। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 30 सितंबर को यह पावन तिथि पड़ रही है। इस शुभ दिन पर देवी महागौरी की भक्ति भाव से पूजा की जाएगी और उनके निमित्त उपवास रखा जाएगा। अष्टमी तिथि पर संधि पूजा का भी विधान है, जो विशेष फलदायी मानी जाती है।
महाअष्टमी का शुभ मुहूर्त
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 29 सितंबर को सायंकाल 04 बजकर 32 मिनट पर होगा, जिसका समापन 30 सितंबर को सायंकाल 06 बजकर 06 मिनट पर होगा। महाअष्टमी का व्रत 30 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन संधि पूजा का शुभ मुहूर्त संध्याकाल में 05 बजकर 42 मिनट से लेकर 06 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।qq
विशेष लाभ: शारदीय महाष्टमी पर करें मां दुर्गा की पूजा
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए 108 नामों का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सच्चे मन से मंत्र जाप करने पर माता रानी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि लाती हैं। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है, बल्कि यह आस्था और मनोकामनाओं की पूर्ति का भी प्रतीक है।
महागौरी की पूजा: शारदीय महाअष्टमी का विधान
शारदीय नवरात्र की महाष्टमी के दिन नवदुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी की पूजा का विधान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने अत्यंत कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। भगवान शिव की कृपा से उन्हें गौर वर्ण की प्राप्ति हुई, तभी से वे महागौरी कहलाईं।
महाअष्टमी पर करें ये उपाय, पाएं विशेष लाभ
महाअष्टमी या दुर्गा अष्टमी के दिन देवी महागौरी की पूजा के साथ-साथ कई श्रद्धालु हवन और कन्या पूजन भी करते हैं। जिनके घरों में अष्टमी पूजन होता है, वे सप्तमी से उपवास रखकर अष्टमी में कन्या पूजन के बाद व्रत का पारण करते हैं। वहीं, जो नवमी पूजन करते हैं, वे अष्टमी को व्रत रखकर नवमी में कन्या पूजन संपन्न करते हैं।
अष्टमी और महाअष्टमी का महत्व: मां पार्वती की तपस्या
मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी तिथि के दिन मां महागौरी का पूजन किया जाता है। माता पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की थी। उन्होंने कंद-मूल, फल और पत्तों का ही आहार किया और अंततः केवल वायु पीकर तप करना जारी रखा। उनकी इस घोर तपस्या से उन्हें महान गौरव प्राप्त हुआ, जिससे उनका नाम महागौरी पड़ा। माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगा में स्नान करने का आदेश दिया। तपस्या के कारण उनका वर्ण श्याम हो गया था, और इसी रूप में वे कौशिकी कहलाईं। गंगा स्नान के पश्चात उनका स्वरूप उज्जवल चंद्र के समान हो गया, तब वे महागौरी कहलाईं। महासप्तमी पर जहां देवी की प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा होती है, वहीं अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा कर व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, महागौरी अत्यंत गौर वर्ण वाली देवी हैं, जो सफेद वस्त्र धारण कर बैल पर सवार होती हैं। उनके चार हाथ हैं, जिनमें वे त्रिशूल सहित अन्य आयुध धारण करती हैं। इस दिन स्नान, ध्यान और षोडशोपचार विधि से की गई पूजा से मां महागौरी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि व शांति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
कन्या पूजन: शारदीय महाष्टमी पर विशेष महत्व
शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि, श्रद्धालु नौ दिनों में कभी भी कन्याओं का पूजन कर सकते हैं, लेकिन अधिकांश भक्त दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर ही यह अनुष्ठान करते हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन 30 सितंबर को दुर्गा अष्टमी पर और 1 अक्टूबर को महानवमी पर किया जाएगा।
करियर और व्यापार में तरक्की के लिए महाष्टमी पर करें ये खास उपाय
यदि आप अपने करियर में सफलता या व्यापार में वृद्धि की कामना रखते हैं, तो महाअष्टमी का दिन आपके लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन कुछ विशेष उपाय मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं।
- कपूर और लौंग का उपाय: महाअष्टमी के दिन माता रानी को कपूर और लौंग अर्पित करें। पूजा के उपरांत इस कपूर को घर में घुमाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और करियर व व्यापार में उन्नति के नए द्वार खुलते हैं।
- पान के पत्ते पर स्वास्तिक: एक पान के पत्ते पर केसर, इत्र और घी मिलाकर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। इस पत्ते पर कलावा लपेटकर एक सुपारी रखकर मां दुर्गा को अर्पित करें। यह उपाय आपकी मनोकामनाएं पूर्ण करता है और कार्यक्षेत्र में सफलता दिलाता है।
धन लाभ और आर्थिक तंगी दूर करने के लिए महाष्टमी पर करें ये उपाय
यदि आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या धन लाभ की इच्छा रखते हैं, तो महाअष्टमी पर ये उपाय अवश्य करें:
- चावल का दीपक: महाअष्टमी की रात्रि में पूजा के बाद चावल से बना एक दीपक अपनी तिजोरी में रखें। यह उपाय धन को आकर्षित करता है और आपकी तिजोरी को हमेशा भरा रखता है।
- तुलसी जी को दूध का अर्घ्य: घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए महाअष्टमी के दिन तुलसी के पौधे में दूध का अर्घ्य दें। यह उपाय घर में धन और सकारात्मकता का संचार करता है।
– प्रज्ञा पाण्डेय
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