करवा चौथ 2025: पति की लंबी उम्र का पर्व, जानें कब है और कैसे करें पूजा
नई दिल्ली: सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बेहद खास होता है, जिसका इंतजार उन्हें बेसब्री से रहता है। यह पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष करवा चौथ की तारीख को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जहाँ कुछ लोगों का मानना है कि यह 9 अक्टूबर को है, वहीं कुछ 10 अक्टूबर की तारीख बता रहे हैं।
क्या है सही तारीख?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को रात 10 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 10 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। चूंकि उदय तिथि मान्य होती है, इसलिए इस बार करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त:
10 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 05:16 बजे से 06:29 बजे तक रहेगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 07:42 बजे है।
करवा चौथ का महत्व:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, करवा नाम की एक स्त्री ने अपनी निष्ठा और दृढ़ता से यमराज से अपने पति की रक्षा की थी। उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पति को जीवनदान दिया था। तभी से इस व्रत को करवा चौथ के नाम से जाना जाता है।
पूजा विधि:
करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी (सास द्वारा दिया गया भोजन) ग्रहण करती हैं। इसके बाद वे चंद्रमा के उदय होने तक निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को महिलाएं सज-धजकर मिट्टी के गणेश जी और करवा की पूजा करती हैं। करवा चौथ की कथा सुनी जाती है और फिर रात में चंद्रमा के निकलने पर छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति के दर्शन कर व्रत खोला जाता है। पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर व्रत पूर्ण करवाते हैं।
‘करवा’ का अर्थ ‘घड़ा’
‘करवा’ शब्द का अर्थ ‘घड़ा’ होता है और ‘चतुर्थी’ का अर्थ ‘चौथा दिन’ है। करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती और प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व पारिवारिक रिश्तों को और गहराता है। सुहागिनों के लिए यह दिन उनके सौभाग्य, प्रेम, त्याग और समर्पण का उत्सव है।
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