लद्दाख की आवाज़: वांगचुक के नेतृत्व में राज्य दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा का आंदोलन
लद्दाख, जो 2019 में जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद एक केंद्र शासित प्रदेश बना, आज एक अभूतपूर्व आंदोलन का गवाह बन रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं सोनम वांगचुक, जो ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (LAB) और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (KDA) के प्रमुख प्रवक्ता हैं। वांगचुक, एक प्रतिष्ठित जलवायु कार्यकर्ता, पाँच वर्षों से अधिक समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और लेह व कारगिल के निवासियों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं।
यह आंदोलन लद्दाख के निवासियों की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण जन संघर्ष बन गया है। हालिया हिंसक घटनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा वांगचुक पर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन उन्होंने इन सभी दावों का खंडन किया है और आंदोलन के शांतिपूर्ण स्वरूप पर जोर दिया है।
पीटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह आंदोलन न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि लद्दाख के भविष्य को लेकर एक निर्णायक मोड़ आ खड़ा हुआ है।
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