मां कात्यायनी का षष्ठी: दिव्य भोग, मंत्र और अलौकिक कथा

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मां कात्यायनी का षष्ठी: दिव्य भोग, मंत्र और अलौकिक कथा
Shardiya Navratri Day 6: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को लगता है किस चीज का भोग?क्या है पूजा विधि और कथा? | Shardiya Navratri Day 6 Maa Katyayani: कैसे करते हैं मां कात्यायनी की पूजा? पढ़िए मंत्र, भोग और कथा

शारदीय नवरात्रि का छठा दिन: मां कात्यायनी की महिमा और पूजा विधि

नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 28 सितंबर को नवरात्रि का छठा दिन है, जो देवी दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी को समर्पित है। सुनहरे रंग की यह देवी चार भुजाओं वाली हैं, जिनके हाथों में अभय और वर मुद्रा, तलवार और कमल का फूल सुशोभित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां की सच्चे मन से पूजा करने से जीवन से रोग, भय और दुख दूर होते हैं।

मां कात्यायनी का स्वरूप और महत्व

मां कात्यायनी का रूप अत्यंत तेजस्वी और कल्याणकारी है। उनके चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल का फूल धारण किए हुए हैं। दाहिने हाथ अभय और वर मुद्रा में हैं, जो भक्तों को सुरक्षा और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मान्यता है कि मां कात्यायनी की पूजा से धन, यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह पूजा रोग, शोक और भय से मुक्ति भी दिलाती है।

पूजा विधि और मंत्र

मां कात्यायनी की पूजा में रोली, अक्षत, पीले फूल और शहद का भोग लगाया जाता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • मंदिर में मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • घी का दीपक जलाकर रोली, अक्षत, धूप और पीले फूल अर्पित करें।
  • मां को शहद या शहद से बनी खीर का भोग लगाएं।
  • मां कात्यायनी के मंत्रों का जाप करें।

मंत्र:

  • मूल मंत्र: “कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।”
  • स्तुति मंत्र: “या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

मां कात्यायनी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने संतान प्राप्ति के लिए मां भगवती की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। उस समय महिषासुर नामक दैत्य का अत्याचार तीनों लोकों पर बढ़ रहा था। महर्षि कात्यायन के घर जन्म लेने के कारण उन्हें कात्यायनी नाम मिला। मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर तीनों लोकों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।

इस प्रकार, नवरात्रि का छठा दिन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और आशा का प्रतीक भी है। यह दिन हमें बुराई पर अच्छाई की जीत और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का संदेश देता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और धार्मिक जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सामग्री का उद्देश्य किसी भी प्रकार की धार्मिक सलाह, व्यक्तिगत या वित्तीय निर्णय के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना नहीं है।


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