मोक्षदा एकादशी 2025: गीता जयंती का पावन पर्व, जानें महत्व, श्लोक और उपाय
नई दिल्ली: आज मोक्षदा एकादशी का पावन दिन है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। यह एकादशी ‘गीता जयंती’ के नाम से भी विख्यात है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणभूमि में अर्जुन को भगवद् गीता का अनमोल उपदेश दिया था। यह दिन आत्मज्ञान, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के पालन का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करता है।
गीता जयंती: आध्यात्मिक दर्शन का संगम (मोक्षदा एकादशी 2025)
भगवद् गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला एक गहन आध्यात्मिक दर्शन है। इसके 700 श्लोकों में ऐसे सिद्धांत निहित हैं जो व्यक्ति को मानसिक शांति, विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता और एक संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
गीता के प्रमुख संदेश (मोक्षदा एकादशी 2025)
- कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन: इस श्लोक का अर्थ है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता करना उसका अधिकार नहीं। यह कर्म की महत्ता को दर्शाता है।
- न जायते म्रियते वा कदाचित्: यह आत्मा की अमरता का संदेश देता है। आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही कभी मरती है।
जीवन में स्थिरता का सूत्र (मोक्षदा एकादशी 2025)
- समत्वं योग उच्यते: सुख-दुःख, लाभ-हानि जैसी द्वंद्वात्मक परिस्थितियों में समान भाव बनाए रखना ही योग है।
- विद्याविनयसम्पन्ने… पण्डिता: समदर्शिन: ज्ञानी व्यक्ति सभी प्राणियों में एक ही परमात्मा का वास देखता है, इसलिए वे सब के प्रति समभाव रखते हैं।
मोक्षदा एकादशी पर करें ये उपाय (मोक्षदा एकादशी 2025)
- घर पर विधि-विधान से गीता का पाठ करें।
- भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्ज्वलित करें।
- किसी जरूरतमंद को अन्न या वस्त्र का दान करें।
- जीवन में सकारात्मक कर्म करने का संकल्प लें।
DISCLAIMER: यह जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी जानकारी को व्यवहार में लाने से पूर्व किसी योग्य ज्योतिष या पंडित की सलाह अवश्य लें।
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