मोक्षदा एकादशी 2025: कल्याण का महा पर्व, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
मोक्षदा एकादशी 2025: कल्याण का महा पर्व, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Mokshada Ekadashi 2025 Kab Hai: मोक्षदा एकादशी कब है? क्या है पूजा विधि? | Mokshada Ekadashi 2025 Kab Hai: Date, Puja Vidhi, Katha, Significance do-dont, kya kare kya na kare in Hindi

मोक्षदा एकादशी 2025: कब है, पूजा विधि, महत्व और क्या करें, क्या न करें

Religion Spirituality
oi-Ankur Sharma
Updated: Sunday, November 30, 2025, 1:20 [IST]

हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वर्ष भर में आने वाली 24 एकादशियों में से मोक्षदा एकादशी अत्यंत पुण्यदायी है। शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और दिवंगत पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। इसी कारण इसे ‘मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी’ कहा गया है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में आता है और गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। पंचांग के मुताबिक मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर को है।

मोक्षदा एकादशी 2025 की तिथि

इस दिन सबसे पहले सुबह स्नान कर साफ और शांत जगह पर पूजा करने का स्थान तैयार करें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मोक्षदा एकादशी व्रत का संकल्प लें। विष्णु भगवान का गंगाजल से आचमन कराएं। फूल, अक्षत, चंदन, धूप-दीप और तुलसी अर्पित करें। भगवान को पीला वस्त्र पहनाएं। श्रीविष्णु सहस्रनाम या गीता अध्याय 12 का पाठ करें।

मोक्षदा एकादशी 2025 का महत्व

शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से मोक्ष प्राप्त होता है। इस एकादशी का फल अनंत कोटि यज्ञों के फल के समान माना गया है। इस व्रत को करने से पितरों की मुक्ति होती है और परिवार पर से पितृदोष का प्रभाव कम होता है। व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। भक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति मार्ग में प्रगति का अवसर है।

मोक्षदा एकादशी 2025 की पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर साफ और शांत जगह पर पूजा करने का स्थान तैयार करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मोक्षदा एकादशी व्रत का संकल्प लें।
  • फूल, अक्षत, चंदन, धूप-दीप और तुलसी अर्पित करें।
  • भगवान को पीला वस्त्र पहनाएं।
  • श्रीविष्णु सहस्रनाम या गीता अध्याय 12 (भक्ति योग) का पाठ करें।
  • अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।

मोक्षदा एकादशी 2025 व्रत कथा

शास्त्रों के अनुसार चंपकवन नामक नगर में वैखानस नाम के राजा का शासन था। एक दिन उन्होंने सपना देखा कि उनके पिताजी यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। राजा दुखी होकर महर्षि पराशर के पास गए। ऋषि ने बताया कि तुम्हारे पितरों की मुक्ति मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से होगी। राजा ने इस दिन पूर्ण विधि से व्रत कर दान-पुण्य किया। फलस्वरूप उनके पिता को मोक्ष प्राप्त हुआ। तभी से यह एकादशी पितृमुक्तिदायिनी कही गई।

मोक्षदा एकादशी 2025 में क्या करें

  • सुबह जल्दी उठकर साफ-सफाई करें।
  • शांत मन से भगवान विष्णु का नामजप करें।
  • गीता का पाठ अवश्य करें।
  • किसी जरूरतमंद को भोजन, कंबल, कपड़े आदि का दान करें।
  • ब्राह्मण या गौ-सेवा से विशेष पुण्य मिलता है।
  • व्रत में फलों, दूध, सूखे मेवे, साबूदाना, कुट्टू आटा आदि का सेवन करें।

मोक्षदा एकादशी 2025 में क्या न करें

  • मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
  • वाद-विवाद, क्रोध या नकारात्मक सोच से बचें।
  • झूठ बोलना, चोरी, हिंसा या किसी का दिल दुखाना वर्जित है।
  • अनावश्यक यात्राओं से परहेज करें।
  • द्वादशी तिथि से पहले व्रत न खोलें।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *