🌞 ब्रह्मांड की रचयिता माँ कूष्मांडा: दिव्य मंत्र, मनमोहक भजन और पूजा विधि 🌞
नवदुर्गाओं में चतुर्थ माँ कूष्मांडा, ब्रह्मांड की आदि शक्ति और सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनकी आराधना से जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है, मन-मस्तिष्क शांत रहता है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ कूष्मांडा के मंत्र और भजनों का स्मरण विशेष फलदायी माना जाता है।
मनोवांछित फल की प्राप्ति
भक्तों का विश्वास है कि माँ कूष्मांडा को समर्पित मंत्र “ॐ ह्रौं ह्रीं श्रीं कूं महालक्ष्म्यै नमः” का जाप सभी बाधाओं को दूर कर मनोवांछित फल प्रदान करता है। कमल का पुष्प अर्पित करना और ध्यानपूर्वक भजन सुनना आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, माँ कूष्मांडा के मंत्रों और भजनों का नियमित श्रवण या पाठ मानसिक तनाव को कम करता है और जीवन में नव ऊर्जा का संचार करता है। यह न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि दैनिक जीवन में संतुलन और खुशहाली भी लाता है।
🪷 माँ कूष्मांडा का मंत्र 🪷
1. मुख्य मंत्र:
“ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः”
अर्थ: सृष्टि की निर्माता माँ कूष्मांडा को नमन।
(108 बार या यथासंभव जाप करें।)
2. बृहत्तर मंत्र (पूजन के समय):
“ॐ ब्रह्माण्ड स्वरूपिण्यै कूष्माण्डायै नमः”
अर्थ: जो ब्रह्मांड के स्वरूप में हैं, उस माँ कूष्मांडा को नमन।
3. सरल आरती मंत्र:
“जय माँ कुष्मांडा मैया, सर्व जग की रचयिता। दुःख हरने वाली माता, भक्तों की हो सहायिका।”
(भजन या आरती के समय गाया जाता है।)
माँ कूष्मांडा का भजन 🎶
“चौथा जब नवरात्र हो, कूष्मांडा को ध्याते।
जिसने रचा ब्रह्मांड यह, पूजन है करवाते॥
आध्शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छाव कही धूप॥
कुम्हड़े की बलि करती है, तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीझती, सात्विक करे विचार॥
क्रोधित जब हो जाए यह, उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर माँ, पीड़ा देती अपार॥
सूर्य चन्द्र की रोशनी, यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया, तू ही राह दिखाए॥
नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ।
नवरात्रों की माँ, कृपा कर दो माँ॥
जय माँ कुष्मांडा मैया।
जय माँ कुष्मांडा मैया॥”
🪷 माँ कूष्मांडा की पूजा विधि 🪷
- पुजन सामग्री: माँ कूष्मांडा को लाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुड़हल, कमल और गेंदे के फूल अर्पित करें।
- भोग: माँ को मालपुआ, दही और हलवा अर्पित करें। मालपुआ माँ को विशेष प्रिय है।
- मंत्र: “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” का जाप करें।
- आरती: नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की आरती गाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
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